ग्वालियर|कव्वाली मनोरंजन की वस्तु नहीं इबादत का जरिया है। सैकड़ों वर्ष पूर्व हमारे सूफी संतों ने इसी को खुदा से लौ लगाने का एक जरिया बनाया था। यह विचार सज्जादानशीन ख्वाजा राशिद खानूनी ने हजरत ख्वाजा खानून के उर्स में गुरुवार को आयोजित कव्वाली कार्यक्रम में व्यक्त किए।