स्कूलों का समय बदला तो 30 % छात्र घटे

4 वर्ष पहले
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संकट में हैं 100 फीसदी रिजल्ट देने वाला उत्कृष्ट स्कूल का स्टाफ

एजुकेशन रिपोर्टर|ग्वालियर

कुछ प्राइमरी-मिडिल स्कूलों का समय दोपहर में करके विभाग ने उन परिवारों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है जो कामकाजी हैं। स्कूल का समय बदलने के बाद अब इन सरकारी स्कूलों में 30 फीसदी छात्र संख्या कम हो गई है। दूसरी तरफ 11 सौ छात्रों के उत्कृष्ट स्कूल में 100 फीसदी रिजल्ट रहने के बाद भी यहां के स्टाफ को बदलने की तैयारी है। इससे यहां के टीचिंग स्टाफ में गुस्सा है। कुछ तो सरकार के इस निर्णय को लेकर कोर्ट की शरण की तैयारी कर रहे हैं।

मजदूरी पर जाने वाले अभिभावक सबसे ज्यादा परेशान
प्राइमरी-मिडिल स्कूलों का समय 4 जुलाई से बदला है। ऐसा क्यों किया इसका जवाब अफसरों के पास नहीं है। जो स्कूल सुबह 10.30 बजे से लग रहे हैं, इनमें छात्र लगातार घटते जा रहे हैं। प्राइमरी स्कूल कृष्णा देवी टाल, आभा महाराज की गली, लाल टिपारा, मिडिल स्कूल जीवाजीगंज, सनातन धर्म आदि तो ऐसे हैं जिनमें छात्र संख्या 50 फीसदी कम हो गई है। यह बात पिछले पांच दिन में हुए निरीक्षण मे सामने आई है। चार जुलाई से पहले तक जब ये स्कूल सुबह की पाली में लगते थे तब इनमें छात्र संख्या दर्ज के मुकाबले केवल 15 फीसदी तक कम रहती थी। आज भी जो स्कूल सुबह ही लग रहे हैं वहां छात्र संख्या पहले जैसी ही है। दोपहर में छात्रों के स्कूल न आने की मुख्य वजह इनके या फिर पालकों का मजदूरी पर जाना है। कुछ परिवार में माता-पिता दोनों मजदूरी करते हैं। ऐसे में उन्हें घर पर बच्चों को रखना पड़ता है। सुबह के वक्त यह परेशानी नहीं रहती है। अभिभावकों का कहना है कि बदली टाइमिंग में बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल हो गया है।

अब बिगड़ जाएगी उत्कृष्ट स्कूल की क्वालिटी
प्रदेश के 235 उत्कृष्ट व 201 मॉडल स्कूलों के लिए टीचरों की परीक्षा होनी है। जो मैरिट में आएंगे उन्हें पसंद का स्कूल मिलेगा। जिनके नंबर कम होंगे उन्हें सरकार अपनी पसंद से दूसरे स्कूलों में भेजेगी। अब सवाल यह है कि जब उत्कृष्ट स्कूलों का रिजल्ट अच्छा है तो यह प्रयोग क्यों? बात यदि ग्वालियर के उत्कृष्ट स्कूल की करें तो इसमें 25 टीचिंग स्टाफ है। रिजल्ट तीन साल से 100 फीसदी और दस साल से 95 फीसदी से ज्यादा आ रहा है। बात अन्य स्कूलों की करें तो इससे अच्छा परिणाम संभव भी नहीं है। स्कूल में काम कर रहे टीचरों को भी परीक्षा देनी है। इन्हें यहां रहना है तो मैरिट में आना होगा नहीं आए तो किसी दूसरे जिले में पोस्टिंग होगी। टीचरों के मुताबिक यदि ग्वालियर के टीचर को सरकार बाहर के स्कूलों में भेजेगी तो वह उतनी मेहनत नहीं करेगा जितनी आज कर रहे है। ठीक ऐसा ही बाहर का टीचर यहां लाने पर होगा। विभाग के परीक्षा संबंधी निर्णय को लेकर टीचर कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। टीचर्स का कहना है कि इससे स्टूडेंट्स का भविष्य खराब हो रहा है। साथ ही टीचर्स भी अनावश्यक रूप से परेशान हो रहे हैं।

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