वाग्देवी बनकर तैयार, ले जाने वाला कोई नहीं
भोजशाला के इतिहास में पहली बार बाहर पूजा की तैयारी
भोजशाला से प्रशांत कालीधार/योगेश पंवार
हिन्दू जागरण मंच और भोज उत्सव समिति ने गुरुवार रात 10 बजे ऐलान किया कि बसंत पंचमी पर भोजशाला के बाहर पूजा की जाएगी। इससे पहले दिनभर भाजपा और प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि समिति को भीतर पूजा करने के लिए मनाते रहे। हिन्दू संगठनों की अखंड पूजा की शर्त पर जब बात नहीं बनी तो समिति ने बाहर पूजा करने का ऐलान यह कहते हुए कर दिया कि सुबह तक का वक़्त शेष है। सुबह तक बात मान ली जाती है तो बसंतोत्सव भोजशाला के भीतर मनाया जा सकता है। अन्यथा, पहली बार बाहर सड़क पर पूजा करने को मजबूर होना पड़ेगा।
पहली बार धार में सुरक्षाबलों की 26 कंपनियां बुलाई गई हैं। 9 हजार से ज्यादा जवान धार की सड़कों और गलियों में डटे हुए हैं। 12 आईपीएस, 25 डीएसपी, 135 टीआई, 600 एसआई भी दल-बल के साथ स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
कड़ी सुरक्षा के बीच महिलाओं-बच्चों ने जवानों के साथ सेल्फी ली।
ग्वालियर| बसंत पंचमी पर धार में पूजा करने के लिए बड़े स्तर पर तैयारियां की गई हैं। यज्ञ करने के लिए हवन कुंड बनाए गए हैं। वहीं, धार की भोजशाला के लिए ग्वालियर में पांच साल पहले बनकर तैयार हुई वाग्देवी की प्रतिमा को ले जाने वाला कोई नहीं है। प्रशासन के आदेश के बाद यह प्रतिमा मूर्तिकार प्रभात राय की सुपुर्दगी में रखी हुई है। वे पांच साल से उन लोगों का इंतजार कर रहे हैं, जिन्होंने प्रतिमा बनाने का ऑर्डर दिया था। लेकिन उनकी ओर से न तो कोई सूचना आती है और न कोई प्रतिमा लेने आता है।
ऊंचाई- 3.6 फीट
चौड़ाई- 1.3 फीट
लागत- Rs.1 लाख