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6 बदलाव से बढ़ेगी शिक्षा की गुुणवत्ता

5 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर हमारे देश के इतिहास में हायर एजुकेशन के दो बेहतर उदाहरण हैं इसमें नालंदा और तक्षशिला विश्वविद्यालय को आज भी मानक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन आजादी के बाद हमारे देश का हायर एजुकेशन सिस्टम कमजोर हुआ है। आज इंडिया में हायर एजुकेशन के लिए इंटरनेशनल लेवल की फैसिलिटी वाले कैंपस नहीं हैं। ऐसे में देश का टैलेंट बाहर जा रहा है। इसको रोकने के लिए हमें हायर एजुकेशन सिस्टम को सुधारना होगा। इसके लिए स्टूडेंट्स की कम्युनिकेशन स्किल, अवेयरनेस, प्रजेंटेशन स्किल सहित अन्य बातों पर भी ध्यान देने की जरूरत है। यह निष्कर्ष टाइम इंस्टीट्यूट की ओर से हुए पैनल डिस्कशन में निकला। इसमें ओपी

1. विजन एंड मिशन फॉर वर्ल्ड क्लास एजुकेशन

सुझाव : इंडिया के हायर एजुकेशन सिस्टम में अभी भी कई खामियां हैं। 15 स्टूडेंट्स पर एक फैकल्टी होनी चाहिए, लेकिन यहां हायर एजुकेशन में अनुभवी फैकल्टी की कमी है।

2. उच्च शिक्षा के लिए बनाए गए अधिनियम

सुझाव : भारत में उच्च शिक्षा के लिए बनाए गए अधिनियम में कई खामियां हैं। इस वजह से कई ऐसे कॉलेज संचालित हो रहे हैं जिनके पास मान्यता ही नहीं है।

3. फैकल्टी एंड रिसोर्स

सुझाव : एजुकेशन कोई इंडस्ट्री नहीं है। इसलिए हायर एजुकेशन में रिसर्च फील्ड में अनुभव रखने वाले फैकल्टी का प्लेसमेंट होना चाहिए। इससे स्टूडेंट्स को एडवांस नॉलेज मिलेगी।

4. नॉलेज, क्रिएशन एंड पब्लिकेशन

सुझाव : फैकल्टी के पास नॉलेज और क्रिएशन की कमी है। ऐसे में स्टूडेंट्स बेहतर एजुकेशन सिस्टम से दूर हैं। इसे दूर करने के लिए फैकल्टी की एडवांस ट्रेनिंग जरूरी है।

5. ग्लोबल कल्चर

सुझाव : यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स को हायर स्टडी कल्चर के साथ इंटरनेशनल ट्रेंड के लिए तैयार किया जाए। अब हर जगह ग्लोबल कल्चर है।

6 एजुकेशन और इंडस्ट्री गैप

सुझाव : देश में आज भी एजुकेशन सेक्टर और इंडस्ट्री के बीच गैप है। इसे दूर करने के लिए पढ़ाई के दौरान ट्रेनिंग प्रोग्राम को सभी के लिए अनिवार्य किया जाए। इससे स्टूडेंट्स को पढ़ाई के बाद इंडस्ट्री में बेहतर जॉब मिल सकेंगे।

पैनल में मौजूद राजेश्वरी सावंत, सी गोपीनाथ, डॉ. सी राज कुमार, अनीता सेठ एवं पूनम रायजादा।

शहर के साथ बाहर से आए यूनिवर्सिटी, कॉलेज और स्कूल के सदस्य हुए शामिल
जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. सी राज कुमार, ओपी जिंदल ग्लोबल बिजनेस स्कूल के डीन सी गोपीनाथ, टाइम इंस्टीट्यूट ग्वालियर के डायरेक्टर दर्पण दीक्षित, ग्वालियर ग्लोरी हाई स्कूल की प्रिंसिपल राजेश्वरी सावंत, ईसीएस बैगलेस स्कूल की प्रिंसिपल पूनम रायजादा, जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल अनीता सेठ,

भारतीयम विद्या निकेतन के प्रिंसिपल उमेश मिश्रा, डीपीएस की काउंसलर शिल्पा मौजूद रहीं।

pannel discussion

टाइम इंस्टीट्यूट की ओर से आयोजित पैनल डिस्कशन में देशभर से आए एक्सपर्ट ने दिए सजेशन, बताए भविष्य के लिए क्या होने चाहिए बदलाव
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