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वो सुसाइड कर ही नहीं सकते और ऐसा किया है तो ऑफिस वालों ने उन्हें बहुत सताया होगा

5 वर्ष पहले
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पुलिस कर रही है जांच उसी में साफ होगा
सवाल
पुलिस से परिजन के
वो सुसाइड नहीं कर सकते, जरूर ऑफिस की किसी साजिश के कारण उन्हें ऐसा करने पर मजबूर होना पड़ा होगा। यह आरोप एजी ऑफिस के सीनियर एकाउंटेंट ज्ञानेंद्र सिंह की प|ी, बेटा व बेटी सहित परिवार के सभी सदस्य लगातार दोहरा रहा है।

ज्ञानेंद्र की मौत से सदमें में डूबे परिवार का कहना है- वे डरने वालों में से नहीं थे और अगर ऐसी नौबत अा भी गई कि उन्हें सुसाइड करना पड़ा तो ऑफिस में उन्हें इतना सताया गया होगा कि वे अपनी जान देने काे मजबूर हो गए। परिजन का कहना है कि घटना के बाद ऑफिस से उनके घर पर एक फोन तक नहीं किया गया और सीधे उन्हें अस्पताल भिजवा दिया, यहीं सबसे बड़ा संदेह है।

गिरे कैसे, यह जांच का विषय: ज्ञानेंद्र की शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में गिरने से पसलियां टूटने और फेफड़े फटना बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक फेफड़े फटना ज्ञानेंद्र की मौत का कारण बना होगा। वहीं फॉरेंसिक एक्सपर्ट आनंद पाड़े ने बताया इस मामले में मौके पर ऐसा साक्ष्य नहीं मिला जिससे यह स्पष्ट हो कि ज्ञानेंद्र गिरे कैसे? पुलिस मामले की जांच कर रही है।

मुझसे हाथ मिलाया तब ठीक थे, एक घंटे बाद चेहरा उतरा था

ऑफिस में उनके साथी एसके पाल ने बताया, जब ज्ञानेंद्र आॅफिस आए तो मूड ठीक लग रहा था एक घंटे बाद मैंने उन्हें ड्रॉवर में कुछ रखते देखा था तब उनका चेहरा तनाव में था।

(परिजन के मुताबिक)

सरिता ( प|ी): परसों उन्होंने कहा था कि ऑफिस में कुछ गड़बड़ चल रही है। वे जो भी फाइल आगे बढ़ाते हैं उसमें ओवरराइटिंग करता है और वह वापस आ जाती है,। लगता है कोई उन्हें फंसाना चाहता है। वो कुछ डिप्रेस भी दिख रहे थे।

सूर्यप्रताप उर्फ शक्ति (बेटा) : पापा, सुसाइड कर ही नहीं सकते। उनके ऑफिस के लोग पापा के खिलाफ षडयंत्र कर रहे थे। उन्हें खिड़की से धक्का देकर फेंका गया और कई घंटो तक मोबाइल भी छिपाया गया। ऑफिस के अधिकारी क्यों सामने नहीं आए।

डॉली (बेटी) : मेरे पिता सुसाइड करने वालों में से नहीं थे। इतने बड़े ऑफिस में एक आदमी की मौत हो गई और किसी ने कुछ नहीं देखा। ये सुसाइड है भी तो यह नौबत ऑफिसवालों ने खड़ी की है।

 खिड़की से नीचे गिरना बताया जा रहा है,वहां कैमरा क्यों नहीं लगा है।

 एजी ऑफिस के अधिकारी एजी, एएओ, एकाउंट ऑफिस तत्काल सामने क्यों नहीं आए और इतनी बड़ी घटना पर किसी ने घर फोन क्यों नहीं किया।

 बॉडी पर सिर्फ पैर में चोट का निशान है और पसलियां टूटी हैं। ऊंचाई से गिरने पर भी सिर में चोट न होना आैर अन्य किसी जगह से ब्लड न निकलना संदेह को जन्म देता है।

 पुलिस ने स्पॉट यानी क्राइम सीन काे प्रिजर्व क्यों नहीं किया व जहां लाश पड़ी थी वहां मार्किंग क्यों नहीं की।

क्या आप हमारा आदमी लौटा दोगे
पीएम के बाद लाश एजी ऑफिस ले गए जहां परिजन मेन गेट पर धरना देने बैठ गए। उनकी मांग थी कि अधिकारियों को नीचे बुलाया जाए। यहां टीआई संजीव नयन शर्मा एकाउंट ऑफिसर एके दीक्षित को बुलाकर लाए तो परिजन ने एजी ऑफिस के अधिकारियों पर सवाल उठाने के साथ ही उन पर हत्या का आरोप भी लगा डाला। परिजन का गुस्सा शांत न होते देख एसडीएम महीप तेजस्वी, सीएसपी डीवीएस भदौरिया भी मौके पर पहुंचे और पुलिस फोर्स भी लिया। इस पर परिजन ने कहा कि -आप लोग क्या हमारा आदमी लौटा दोगे। परिजन कलेक्टर को मौके पर बुलाने आैर मजिस्ट्रियल जांच के आदेश देने की मांग पर अड़ गए। इस पर एसडीएम ज्ञानेंद्र की बेटी आैर दो परिजन को लेकर कलेक्टर के पास पहुंचे, जहां कलेक्टर ने मजिस्ट्रियल जांच का भरोसा दे दिया। ज्ञानेंद्र 3 बहनों में अकेले भाई थे। उनके 1 बेटी आैर 1 बेटा है। बेटी की शादी हो चुकी है।

एकाउंटेंट ज्ञानेंद्र की मौत के मामले में पुलिस अपना इनवेस्टीगेशन कर रही है। परिजन का जो भी आरोप है, वह भी जांच में ही स्पष्ट होगा। विभागीय इंक्वायरी का कोई प्रावधान नहीं है। -सुनील राज, एकाउंटेंट जनरल,मप्र

क्या हुआ सोमवार को, दफ्तर में एंट्री से डेथ तक
ज्ञानेंद्र रोज की तरह ऑफिस आए और तीसरी मंजिल पर निधि-4 में अपने कक्ष में चले गए। यहीं उनके साथी दिवाकर कुशवाह और दिलीप सक्सेना के साथ वे 12 बजे ऑफिस की ही कैंटीन में चाय पीकर सेक्शन में आए। यहां आते ही उन्होंने अपने ड्रावर में कुछ सामान रखा अौर सीट पर आए। इसके बाद उन्हें किसी ने नहीं देखा और फिर सीधे उनके गिरने की खबर ऑफिस में फैली। कोई पांचवीं, कोई चौथी तो कोई तीसरी मंजिल से ज्ञानेंद्र के गिरने की बात कह रहा था। ऑफिस में उनके कक्ष के बाहर करीब साढ़े तीन फीट चौड़ी खिड़कियां हैं, जिससे नीचे गिरकर उनकी मौत होना बताई गई है।

एजी ऑफिस में बॉडी को लेकर हंगामा करते मृतक के परिजन को समझाते एसडीएम।

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