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‘ग्वालियर में बड़े-बड़े नेता हैं, यहां मेरा क्या काम’

5 वर्ष पहले
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प्रभारी मंत्री होने के बाद भी ग्वालियर से दूरी बनाकर रखने वाले प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया का कहना है कि ग्वालियर में तो पहले से ही बड़े-बड़े नेता हैं, वे यहां के विकास कार्य व योजनाओं पर ध्यान दे लेते हैं, ऐसे में मेरा ज्यादा आना जरूरी नहीं है इसलिए मैं कम आता हूं। बुधवार को ग्वालियर प्रवास के दौरान दैनिक भास्कर रिपोर्टर से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यहां मौजूद बड़े नेता खुद ही अफसरों के साथ समीक्षा कर लेते हैं और काम करा लेते हैं तो मैं क्या करूंगा? उनका ये कहना ग्वालियर में भाजपा के उन कद्दावर नेताओं के लिए कटाक्ष था, जिनके सामने प्रभारी मंत्री की बात भी हल्की साबित हो जाती है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा सभी प्रभारी मंत्रियों को फटकार लगाए जाने के बाद श्री मलैया छह महीने बाद मंगलवार रात को ग्वालियर में प्रशासनिक समीक्षा के लिए आए थे और इसी सवाल के जवाब में उन्होंने अपना दर्द शब्दों में बयां कर दिया।

अभी और बढ़ेगा कर्ज

एक सवाल के जवाब में श्री मलैया बोले, प्रदेश सरकार पर अभी 1 लाख 15 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है और ये कर्ज अभी बढ़ेगा, क्योंकि मप्र में विकास हो रहा है। हमारे पास कर्ज पटाने के संसाधन हैं इसलिए हम कर्ज लेने से नहीं घबरा रहे। उन्होंने कहा, गरीबों को मुफ्त में राशन व तीर्थयात्रा आदि कराने से सरकार को कोई परेशानी नहीं है और ऐसी योजनाएं चलती रहेंगी। ये योजनाएं राजनीतिक फायदे के लिए शुरू नहीं की गईं।

अफसरों को कानून नहीं तोड़ना चाहिए, मैं बात करूंगा: बीते दिनों छप्परवाला पुल पर अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान दुकानदारों से मारपीट के मामले में श्री मलैया ने कहा है कि अफसरों को किसी के साथ मारपीट के अधिकार नहीं दिए गए हैं। इस मामले को लेकर व्यापारियों एवं पार्टी नेताओं द्वारा प्रभारी मंत्री शिकायत भी की गई। नगर निगम कमिश्नर अनय द्विवेदी की शह पर अफसरों द्वारा की गई मारपीट का मामला मेरी जानकारी में नहीं। मैं अफसरों से इस बारे में चर्चा करुंगा।

मंत्री के बयान के मायने

पिछले कई वर्षों से भाजपा संगठन व सत्ता में ग्वालियर का खासा दखल है। यहां से सांसद नरेंद्र सिंह तोमर केंद्र में मप्र से अकेले कैबिनेट मंत्री हैं और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से श्री तोमर की नजदीकी भी जगजाहिर है। ऐसे में यहां का हर प्रशासनिक व राजनीतिक निर्णय श्री तोमर की सहमति के बिना नहीं होता। इससे पहले श्री तोमर और प्रभात झा प्रदेश संगठन की कमान संभाल चुके हैं। चूंकि, दोनों ही ग्वालियर से जुड़े थे इस कारण कमान पूरी तरह उनके ही हाथ में रही। प्रभारी मंत्री यहां आने-जाने की औपचारिकता निभाते रहे।

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