बड़ी मुश्किल से केस लगता है और शोकसभा से सुनवाई नहीं हो पाती
हाईकोर्ट में केस बड़ी मुश्किल से सुनवाई में आ पाता है। लेकिन कई बार शोक सभा अवकाश के कारण उन केसों पर सुनवाई नहीं हो पाती। इससे पक्षकारों को काफी निराशा होती है। साथ ही कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या भी बढ़ती है। इसलिए बार शोक सभा के लिए या तो कोई एक दिवस तय कर लें। या फिर अपने दिवंगत साथी वकील को श्रृद्धांजलि देने का समय शाम 4 से 4.30 रखें। यह विचार जस्टिस जितेंद्र कुमार माहेश्वरी ने बुधवार को जिला बार में वरिष्ठ अधिवक्ता स्व. एनके जैन के चित्र अनावरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि चित्र अनावरण का मतलब उनके गुणों से प्रेरणा लेना है। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला सत्र न्यायाधीश भारती बघेल,एसटीएटी के चेयरमेन एचपी सिंह,विशेष न्यायाधीश सुनीता यादव उपस्थित रहीं। समारोह की अध्यक्षता बार के अध्यक्ष प्रेमसिंह भदौरिया व संचालन सचिव अरविंद शर्मा ने किया। कार्यक्रम में सीजेएम एके पांडे,अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एके सिंह,बार उपाध्यक्ष मृत्युंजय गोस्वामी, अधिवक्ता सीपी सिंह, बलवीर सिंह धाकड़ आदि उपस्थित रहे।
अंग्रेजी की ड्राफ्टिंग पर ज्यादा ध्यान दें वकील
वकील अंग्रेजी की ड्राफ्टिंग पर ज्यादा ध्यान दें। कई बार बाहर से आए जस्टिस अंग्रेजी भाषा को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं। इसलिए वकील को केस की ड्राफ्टिंग इंग्लिश में ही ज्यादा करनी चाहिए।
जिला न्यायालय मंे आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते जस्टिस जीतेन्द्र कुमार माहेश्वरी।