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संगीत सम्मेलन में कलाकारों ने सुनाए रात के कठिन राग

4 वर्ष पहले
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संगीत सम्राट तानसेन की नगरी में शनिवार को 64वां आकाशवाणी संगीत सम्मेलन हुआ। इसमें गायन के साथ वादन में राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों ने प्रस्तुति दी। संगीत के इस कार्यक्रम की शुरुआत किराना-जयपुर घराने की गायकी से हुई। गोवा से आए पंडित दिनकर पणशीकर ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में मध्यलय आड़ा चौताल में 180 से ज्यादा बंदिशें ईजाद की हैं। संगीत सम्मेलन की पहली प्रस्तुति में उन्होंने खयाल गायकी में राग आनंदी केदार से की। पहली बंदिश विलंबित लय तीन ताल बड़ा खयाल में निबद्ध \\\"गोविंद बजावे\\\' सुनाई। इसके बाद मध्यलय छोटा खयाल में \\\"वेणु बजावे मुरारी\\\' सुनाई। संगीत की इस सभा को उन्होंने राग संपूर्ण मालकौंश के साथ आगे बढ़ाया। जिसमें विलंबित तीन ताल में \\\"अपनो रूप\\\' और मध्यलय में \\\"मोरी सुरंग चुनरिया\\\' सुनाई। संगीत की पहली सभा का समापन आड़ा चौताल \\\"सखी आज की शुभ घड़ी सुहागन\\\' सुनाई। संगीत की इस सभा का समापन पं. मदन मोहन उपाध्याय के तबला और पृथ्वी राज कुमार की पखावज जुगलबंदी के साथ हुआ।

संगीत सम्मेलन में हवाईयन गिटार की प्रस्तुति देते देवाशीष चक्रवर्ती।

गायन प्रस्तुत करते पं. दिनकर पणशीकर।

आकाशवाणी संगीत सम्मेलन शनिवार को ग्वालियर सहित दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरू, गुवाहाटी, धर्मशाला, पणजी, पुणे, भुवनेश्वर, कुरुक्षेत्र, वाराणसी, तिरुवनंतपुरम, गुंटूर, मंगलूरू, तिरुचिरापल्ली, मथुरा, जोधपुर, राजकोट, वारंगल और पुडुचेरी में हुआ।

24 शहरों में हुआ संगीत सम्मेलन
हवाईयन गिटार पर घरानेदार धुन
सेनिया-मैहर घराने के कलाकार देबाशीष चक्रवर्ती ने हवाईयन गिटार पर राग मारू विहाग से शुरुआत की। इसमें उन्होंने तीन ताल में धुन बजाईं। यह धुन विलंबित लय, मध्य लय और द्रुत लय में निबद्ध रहीं। जिसमें सेनिया-मैहर घराने के अालाप, जोड़ और पारंपरिक झाला को बजाया। इनके साथ तबले पर संगत दिल्ली से आए दुर्जय भौमिक और तानपुर पर संगत ग्वालियर की पारुल दीक्षित ने की।

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