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फिल्म में हीरो बनने के लिए किया गया था बच्चे का किडनेप

5 वर्ष पहले
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ग्वालियर. डीपीए स्कूल के छात्र रामेंद्र गुर्जर अपहरण कांड के 2 आरोपियों सतीश गुर्जर और बादल दुबे को गिरफ्तार करने के साथ ही इनके द्वारा फिरौती के रूप में ली गई रकम में से 16.20 लाख रुपए भी पुलिस ने बरामद कर लिए हैं।
आरोपियों ने अपहरण से लेकर फिरौती लेने तक की जो कहानी सुनाई उससे पुलिस अफसर भी अचंभित हैं। अपहृत रामेंद्र को लेकर एक आरोपी नोएडा में रहता था तो दूसरा आरोपी ग्वालियर, मथुरा आकर फिरौती का कॉल करता था। फिरौती मांगने वाला आवाज और भाषा भी बदलता था ताकि पुलिस उनकी पहचान न कर पाए, लेकिन अपहरण से पहले छोड़े गए एक क्लू को पकड़कर पुलिस अपहरण करने वालों तक पहुंच गई। पुलिस अधीक्षक हरिनारायणचारी मिश्रा ने बताया कि रामेंद्र गुर्जर अपहरणकांड को पुलिस ने पूरी गंभीरता से लिया था।
एक माह पहले बनाई थी योजना, क्लू एलआईसी एजेंट से मिले
अपहरणकर्ताओं ने बताया कि वह जानते थे कि पुलिस मोबाइल फोन की लोकेशन के आधार पर उन तक पहुंच सकती है, इसलिए उन्होंने नोएडा में बच्चे को रखा और इसके बाद फिरौती के लिए 3 कॉल ग्वालियर और 1 कॉल मथुरा से किया था। मथुरा में ही उन्होंने रामेंद्र से घरवालों की बात करवाई थी। अपहरणकर्ता सतीश ने एलआईसी एजेंट के यहां पर अपना नाम तो फर्जी बताया था, लेकिन पिता का नाम असली बता दिया। इसके बाद कुछ और क्लू मिले, जिन्होंने पुलिस को दोनों अपहरणकर्ताओं तक पहुंचा दिया।
आरोपियों ने बताया कि वह 1 महीने से अपहरण की योजना बना रहे थे। उन्होंने नोएडा के न्यू अशोक नगर के ए ब्लॉक में कमरा किराए पर लिया था। यह दोनों कई बार ग्वालियर आए और डीडी नगर में सिम विक्रेता गौरव शर्मा की दुकान से 23 जनवरी को फर्जी आईडी से 3 सिमकार्ड खरीदे थे। सतीश वारदात से 15 दिन पहले अपने ताऊ मजबूत सिंह के घर पहुंचा था और रामेंद्र की बड़ी बहन से घरवालों के फोन नंबर भी लिए थे ताकि फिरौती का कॉल किया जा सके।
हीरो बनने के लिए प्रोड्यूसर से करना थी पार्टनरशिप
सतीश और बादल को फिल्मों में हीरो बनना था, इसके लिए उन्हें बताया गया था कि फिल्म निर्माण में प्रोड्यूसर के साथ रुपया भी लगाना होगा तभी हीरो का रोल मिल पाएगा। इसके बाद ही इन दोनों ने अपहरण करने की योजना बनाई। बादल और सतीश ने प्रोडक्शन हाउस के संचालक अरुण नागर को 6.70 लाख रुपए दे दिए थे। पुलिस ने यह रुपए बादल की निशानदेही पर बरामद कर लिए।

पहले घेराबंदी की कहानी सुनाई, अब फिरौती की रकम दिखाई
रामेंद्र के मुक्त होने के बाद पुलिस ने पलवल की फैक्टरी में घेराबंदी कर उसे मुक्त कराने की कहानी सुनाई थी। अपहरणकर्ताओं के गिरफ्तार होने के बाद पुलिस ने अपनी कहानी बदली और फिरौती की बात स्वीकार करने के साथ ही 16.20 लाख रुपए भी बरामद करने की बात बताई। अब पुलिस की दोनों कहानियों पर ही सवाल है आखिर इसमें से सच्ची कहानी कौन सी है ?
पुलिस काम कर रही थी
रामेंद्र के अपहरण के बाद से ही पुलिस लगातार काम कर रही थी, कुछ लोग कह रहे थे कि पुलिस निष्क्रिय हो गई है, लेकिन ऐसा कतई नहीं था। वारदात के बाद से ही एएसपी वीरेंद्र जैन, सीएसपी विनायक वर्मा, डीवीएस भदौरिया, टीआई अमर सिंह, दीपक यादव के नेतृत्व में टीम काम कर रही थी। पुलिस की प्राथमिकता बच्चे की सकुशल रिहाई थी और इसको ध्यान में रखकर ही काम किया गया था।
हरिनारायणचारी मिश्रा, एसपी, ग्वालियर
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