ग्वालियर। प्रदेश के श्योपुर में बीते 68 साल से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की त्रयोदशी(मृत्यु भोज) आयोजित की जा रही है। यहां हर साल 12 फरवरी को चंबल, बनास और सीप नदी के संगम पर ये आयोजन किया जाता है। क्यो निभाई जा रही ये परंपरा...
- 1948 में महात्मा गांधी की अस्थियां राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित त्रिवेणी संगम में विसर्जित की गई थीं, तभी से गांधी विचार मंच ने 12 फरवरी को यहा बापू की त्रयोदशी मनाना शुरु किया था।
- इस दिन त्रयोदशी के धार्मिक संस्कारों के साथ ही गांधीवादी चिंतक इकट्ठे होकर विचार मंथन करते है। इसके बाद भोज होता है, जिसमें आसपास के गांवों से लोग आते हैं। गांधी विचार मंच के इस आयोजन में इस बार बुजुर्ग सर्वोदयी समाजसेवी एसएन सुब्बाराव भी शामिल हुए।
जयपुर नरेश लेकर आए थे गांधी जी का अस्थिकलश
जयपुर नरेश सवाई भवानी सिंह के नेतृत्व में 12 फरवरी 1948 को बापू का एक अस्थि कलश चंबल, बनास और सीप नदियों के संगम पर विसर्जित किया गया था। श्योपुर से सटे राजस्थान के सवाई माधोपुर सवाई माधोपुर के तत्कालीन विधायक श्रीदास गोयल, वीरेंद्र सिंह तथा श्योपुर के पूर्व विधायक सत्यभानु सिंह चौहान जौसे गांधीवादी विचारकों 12 फरवरी 1949 को बापू की पहली त्रयोदशी मनाई थी।
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