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70 हजार रुपए के बिल में अटकी यात्रियों की सुरक्षा, रन-वे के पास आया सियार

5 वर्ष पहले
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इंदौर. एयरपोर्ट पर पिछले दिनों रन-वे के पास फिर सियार नजर आया। निरीक्षण दल ने इसे देखा और अधिकारियों को सूचना दी। कुछ देर बाद जब अधिकारी पहुंचे तो सियार जा चुका था।
हालांकि प्रबंधन ने इससे इनकार किया है। पहले यहां वन विभाग सर्च कर रहा था, लेकिन विशेषज्ञों पर खर्च किए गए 70 हजार रुपए का भुगतान न होने से इसे बंद कर दिया। इस संबंध में एयरपोर्ट प्रबंधन का कहना है कि वन विभाग ने बिल नहीं दिया, जबकि विभाग का कहना है कि प्रबंधन ने बिल देने से मना कर दिया था।

24 अक्टूबर 2014 की शाम स्पाइस जेट का हैदराबाद जा रहा विमान टेक-ऑफ से पहले रन-वे पर दौड़ रहा था, तभी एक सियार विमान से टकरा गया था। विमान में 64 यात्री सवार थे। विमान में खराबी आ गई थी और सुधार के बाद यह साढ़े तीन घंटे देरी से जा सका था। इसके बाद विमानतल प्रबंधन के आग्रह पर यहां वन विभाग द्वारा सर्च ऑपरेशन चलाया गया था। इसमें चार सियार, दो जंगली बिल्ले और एक कबरबिज्जू को पकड़ा गया था।
इसी बीच भुगतान को लेकर हुए विवाद में वन विभाग ने सर्च को बंद कर दिया। जब सर्च चल रही थी तभी वन विभाग के अधिकारियों ने कहा था कि एयरपोर्ट के एक बड़े हिस्से की जांच की जाना बाकी है। जांच नहीं हुई। इसका ही परिणाम है कि अब भी यहां जंगली जानवर घूम रहे हैं। 6 जून को यहां एक मरा हुआ सियार मिला था और कुछ माह पूर्व एक कुत्ता भी रन-वे तक पहुंच गया था। हाल ही में दोबारा एक सियार का यहां नजर आना खतरे के संकेत दे रहा है।
वन विभाग ने नहीं दिया कोई बिल
हाल ही सियार नजर आने की बात से इनकार करते हुए एयरपोर्ट डायरेक्टर मनोज चंसोरिया ने कहा कि विमानतल पर प्रबंधन लगातार जानवरों की जांच कर रहा है। उन्होंने वन विभाग द्वारा कोई भी बिल
दिए जाने से इनकार करते हुए कहा कि सुरक्षा में कोई कोताही नहीं
बरती जा रही है।
एयरपोर्ट प्रबंधन ने ही मना कर दिया था
वन विभाग के एसडीओ एसएन सक्सेना ने बताया विमानतल प्रबंधन के मीणा इस ऑपरेशन को देख रहे थे। एक माह की सर्च के दौरान उन्हें बताया था कि विभाग ने ऑफिसर और एक्सपर्ट पर 70 हजार खर्च किए हैं। हम उनके पास बिल लेकर पहुंचे तो उन्होंने कहा कि प्रबंधन के पास ऐसा कोई फंड नहीं है। वन विभाग को यह काम जनसुरक्षा की दृष्टि से नि:शुल्क करना चाहिए। हमारे सीसीएफ ने इसे मान लिया था, लेकिन सर्च को बीच में ही रोक दिया गया था।
विशेषज्ञों को करते हैं भुगतान, इसलिए लंबी सर्च अब मंजूरी के बाद ही
वन विभाग के एसडीओ सक्सेना के मुताबिक अब तय किया गया है कि अगर एक-दो दिन की सर्च होगी तो हम नि:शुल्क करेंगे, अन्यथा पहले ही खर्च की जानकारी देकर मंजूरी के बाद ही सर्च शुरू करेंगे। उन्होंने बताया कि जब भी लंबी सर्च होती है और विशेषज्ञों की मदद लेना होती है तो इसका भुगतान करना पड़ता है।
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