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पन्ना रत्न का शिवलिंग पहनकर महादजी सिंधिया बने ग्रेट मराठा शासक

5 वर्ष पहले
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ग्वालियर। सिंधिया राजवंश के संस्थापक महादजी सिंधिया की पगड़ी में शिवलिंग जड़ा हुआ था। मुर्गी के अंडे के बराबर आकार का शिवलिंग पन्ना (EMERALD) जैसे बेशकीमती रत्न से बना हुआ था। कहा जाता है कि इसी बेशकीमती शिवलिंग में सिंधिया राजवंश के सौभाग्य और कामयाबी का राज छिपा हुआ है। शिव के उपासक महादजी की पगड़ी में रहता था करोड़ों का पन्ना....
महादजी सिंधिया ने अंग्रेजों और मुगलों को जमकर परेशान किया और फिर ग्वालियर से अपने शासन की शुरुआत की। महादजी भगवान शिव के उपासक थे और वे हमेशा अपना भगवान साथ रखते थे। यह भगवान उनकी पगड़ी में शिवलिंग के रूप में रहता था। इस शिवलिंग को पन्ना जैसे अनोखे रत्न से बनाया गया था। पन्ना का आकार भी छोटा नहीं, बल्कि एक अंडे के बराबर था।
राजमाता विजयाराजे बताया था इस रत्न के बारे में
राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने भी इस पन्ना के शिवलिंग का जिक्र अपनी बायोग्राफी में किया है। 30 साल पहले इस पन्ने की कीमत करीब एक मिलियन पौंड से ज्यादा यानि करीब पांच करोड़ रुपए आंकी गई थी। आज की स्थिति में यह पन्ना रत्न तो बेशकीमती है, क्योंकि यह 350 साल से ज्यादा पुराना है।
प्रतिदिन होती है इस शिवलिंग की पूजा
अब यह बेशकीमती शिवलिंग सिंधिया राजवंश के निजी पूजा घर का हिस्सा है। बताते हैं कि इसकी प्रतिदिन पूजा होती है। हालांकि राजमाता विजयाराजे सिंधिया की मौत के बाद पन्ना के इस शिवलिंग को किसी ने देखा नहीं है, लेकिन यह सिंधिया राजवंश का हिस्सा है।
यही शिवलिंग है सिंधिया राजवंश की सफलता का राज
कई पीढ़ियों से सिंधिया राजवंश ने शासन किया और आजादी के बाद भी उनका प्रभुत्व कम नहीं हुआ। बताया जाता है कि इस सफलता का राज यही पन्ना का शिवलिंग है। यही कारण है कि सिंधिया राजवंश के लिए यह पन्ना रत्न भाग्यशाली साबित हुआ है।
स्लाइड्स में आगे है महादजी से जुड़े कुछ फोटोज....
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