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व्यापमं फर्जीवाड़ा में गवाही देने पहुंचे आशीष ने दौड़ाई साइकिल, पीछे भागी पुलिस

5 वर्ष पहले
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ग्वालियर. सोमवार को कोर्ट में उपस्थित होने के बाद व्यापमं फर्जीवाड़े के व्हिसिल ब्लोअर आशीष चतुर्वेदी ने सुरक्षा की मांग करते हुए 8वीं बार गवाही देने से इंकार कर दिया। फर्जीवाड़ा के आरोपी राहुल यादव के मामले में कुल 29 गवाह बनाए गए। 26 गवाही हो चुकीं।
 
आशीष को गवाही के लिए पहली बार 12 मई 2015 को बुलाया था। इसके बाद से अब तक करीब दो साल में वह 8 बार कोर्ट में उपस्थित हुआ। लेकिन गवाही नहीं दी। 12 जनवरी 2016 को उसने कोर्ट में कहा कि राहुल यादव मामले की जांच सीबीआई को करनी चाहिए। 13 जनवरी 2017 को कोर्ट में कहा कि उसे पर्याप्त सुरक्षा मिले, अन्यथा गवाही से मुक्त किया जाए। 
 
आशीष ने दौड़ाई साइकिल
कोर्ट से बाहर निकलते ही आशीष ने साइकिल पर फर्राटा भरना शुरू कर दिया। उसकी सुरक्षा में लगे जवानों को इसकी उम्मीद ही नहीं थी। जैसे ही आशीष ने पैडल मारा, जवान उसके पीछे भागने लगे और वो आंखों से ओझल हो गया। 
 
अगली गवाही 27 फरवरी को :
कोर्ट ने गवाह आशीष को अगली सुनवाई के लिए पाबंद करते हुए प्रकरण को 27 फरवरी को गवाही के लिए लगा दिया। और शासन को आशीष की सुरक्षा व्यवस्था तय करने के आदेश दिए। जिला विधिक सहायता को आशीष के लिए वकील नियुक्त करने के लिए कहा।
 
कोर्ट में आशीष का बयान- सुरक्षा मिले तो दूंगा गवाही
विशेष न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की कोर्ट में सोमवार सुबह 11 बजे आरटीआई कार्यकर्ता आशीष चतुर्वेदी पेश हुए। शासकीय अधिवक्ता से बोले- आज बयान देने आया हूं, पूरी गवाही दूंगा। जैसे ही आशीष जज के सामने पहुंचा बोला- मुझे सुरक्षा के नाम पर पुलिस प्रताड़ित करती है, घर की वीडियो रिकार्डिंग कराई जा रही है, कोर्ट में सुरक्षा के बिना आया हूं, सरकारी वकील भी मेरा विरोध करते हैं इसलिए विधिक सहायता से वकील दिलाया जाए। मैं गवाही देने में असमर्थ हूं।
इसके बाद आशीष ने कोर्ट के आदेश पत्र पर भी हस्ताक्षर नहीं किए और बाहर निकल आए।
 
भास्कर से कोर्ट के बाहर बोला- सुरक्षा हटे तो दूंगा गवाही
- आप फरियादी हैं गवाही क्यों नहीं दे रहे, गवाही के बिना फैसला नहीं हो सकता?
आशीष : सरकारी वकील ही फरियादी के वकील होते हैं पर वह कोर्ट में मेरा ही विरोध करते हैं। आज भी मैंने कोर्ट में गवाही देने की बात कही तो हड़कंप मच गया। राहुल यादव पक्ष के वकील आवेदन ले आए कि आरोपी की तबीयत खराब है। वह गवाही होने ही नहीं देना चाहते। आज भी मैं कोर्ट में अकेला पहुंचा, बाद में सरकारी वकील ने सुरक्षा गार्ड को फोन कर बुलाया। 
-  व्यापमं मामले से आपकी पर्सनल व सामाजिक लाइफ पर क्या असर पड़ा है? 
मेरी लाइफ ही खत्म हो गई है। नौकरी पर कोई रखता नहीं, कोई बात तक नहीं करता। 28 को बहन की शादी है, पुलिस घर में रिकॉर्डिंग करा रही है। मेरी सोशल लाइफ खत्म हो गई है।
- जीआरएमसी के एक गुट ने दूसरे को कमजोर करने के लिए आपका इस्तेमाल किया, अब अकेला छोड़ दिया। हर ओर इस बात की चर्चा है आप इस पर क्या कहना चाहेंगे?
वो ग्रुप कब का अलग हो गया। मैं अपना काम कर रहा हूं। एक दिन मामला अंजाम तक पहुंचेगा। 
 
ऐसे कमजोर हो रहा केस
- एसटीएफ : 1. आरोपियों के बयान के आधार पर ही दूसरे आरोपियों को नामजद किया, उनके खिलाफ सबूत नहीं जुटा पाए। 2.  मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार तो किया गया लेकिन प्रत्येक आरोपी से अपराध में प्रयुक्त दस्तावेज जब्त नहीं किए गए। 
-  सीबीआई : 1. जांच शुरू की तो ऐसे आरोपियों की जांच पर ही जोर दिया जिनके खिलाफ वैधानिक सबूत थे। 2. कमजोर गवाह बनाए, कुछ कोर्ट में जाकर मुकर गए।
 
 
 
 
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