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एक्टिंग ट्रेनिंग और क्राइम सीरियल देखकर किया बच्चे का अपहरण

5 वर्ष पहले
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ग्वालियर। दो युवकों ने फिल्म अकादमी से ट्रेनिंग ली और हीरो बनने के लिए रूपए चाहिए थे। घर से नहीं मिले थे 5 साल के बच्चे का अपहरण करके फिरौती वसूली। अपहरण करने के लिए एक क्राइम सीरियल देखकर योजना बनाई औऱ अब पुलिस गिरफ्त में है। ये है मामला.....
ऐसे दोनों युवक सतीश गुर्जर औऱ बादल गुर्जर अब पुलिस की गिरफ्त में हैं। इनके पास से फिरौती के 16.22 लाख रुपए भी मिल गए हैं। दोनों युवक फिल्मों में काम करना चाहते थे, और इसके लिए दिल्ली की एक अकादमी से एक्टिंग की ट्रेनिंग भी ले चुके हैं, लेकिन जब सीरियल में काम करने की बारी आई तो इनसे लाखों रुपए मांगे गए। दोनों को घर से रूपए मिले नहीं, इसलिए अपहरण की योजना बना डाली।
योजना के लिए देखा क्राइम पेट्रोल
दोनों को एक्टिंग तो आ गई, लेकिन अपहरण की योजना बनाने के लिए दोनों ने क्राइम पेट्रोल का सहारा लिया। इसके लिए एक महीने से प्रैक्टिस की। जिस स्कूल में रामेन्द्र गुर्जर पढ़ता था, उसकी पूरी तरह रेकी की। एक डमी से अपहरण का पूर्वाभ्यास भी किया। इसके बाद 2 फरवरी को दीनदयाल नगर के दिल्ली पब्लिक अकादमी (डीपीए) से इन्होंने रामेन्द्र को अपहरण कर लिया। रामेन्द्र को ये दोनों स्कूल से उसकी मां के एक्सीडेंट के बात कहकर ले गए गए और उसे आगरा, मथुरा और पलवल में रखा।
फिरौती के काॅल ग्वालियर और मथुरा से किए
अपहरणकर्ताओं ने बताया कि वह जानते थे कि पुलिस मोबाइल फोन की लोकेशन के आधार पर उन तक पहुंच सकती है, इसलिए उन्होंने नोएडा में बच्चे को रखा और इसके बाद फिरौती के लिए 3 कॉल ग्वालियर और 1 कॉल मथुरा से किया था। मथुरा में ही उन्होंने रामेंद्र से घरवालों की बात करवाई थी।
फिरौती लेकर ही छोड़ा था रामेन्द्र को
6 फरवरी को पुलिस ने पलवल से रामेन्द्र को छुड़ाने का दावा किया, लेकिन इसके लिए रामेन्द्र के पिता शैलेन्द्र सिंह ने करीब 17 लाख रुपए की रकम फिरौती के रूप में दी। पहले तो पुलिस ने एक एनकाउंटर का दावा किया था, लेकिन गुरुवार को एसपी हरिनारायणचारी मिश्रा ने कहा कि पहले बच्चे को सुरक्षित निकालना जरूरी था। उसके बाद पुलिस ने बदमाशों को पकड़ने का आपरेशन चलाया, जिसमें दोनों युवक के साथ फिरौती की रकम भी बरामद हो गई।
LIC एजेंट और मैजिक के ड्राइवर से मिला क्लू
फिरौती की रकम मिलते ही सतीश ने इसके निवेश की योजना बना ली। उसने एक एजेंट एमके गुप्ता से संपर्क किया और अपना मोबाइल नंबर भी दे दिया। फोन पर एजेंट को सतीश ने अपना नाम रवि शर्मा बताया था। इसी मोबाइल नंबर से सतीश टैक्सी बुक कराकर रामेन्द्र को आगरा ले गया था। पुलिस को एजेंट का सुराग कॉल डिटेल से मिला। इसी तरह जिस मैजिक में रामेन्द्र को स्कूल से दोनों युवक ले गए थे, उसके ड्राइवर देवीराम ने भी पुलिस को महत्वपूर्ण आरोपियों के बारे जानकारी दी थी।
रामेन्द्र के छूटने के बाद सक्रिय हुई पुलिस
यह जानकारी आते ही पुलिस ने टीम बनाकर काम किया और भिंड के घिनौची गांव सतीश गुर्जर को पकड़ लाई। ग्वालियर से बादल दुबे को भी पकड़ लिया गया। बादल दुबे अनाथ बच्चा था, लेकिन उसका आधार कार्ड रेलवे वेंडर अनिल दुबे के घर का बना था औऱ पिता का नाम भी उन्हीं का लिखा था। सतीश और अनिल दोनों दोस्त थे।
पहले कोचिंग चलाता था सतीश
एक्टिंग के पहले सतीश गोला का मंदिर इलाके में एक कोचिंग चलाता था। इसी दौरान उसने शैलेन्द्र सिंह के घर की रेकी और उनके बच्चे रामेन्द्र के अपहरण की योजना बनाई। फिरौती की रकम दोनों युवक फिल्मों में काम करना चाहते थे। सतीश ने दो फिल्मों गुर्जर आंदोलन और न तुम जीते न हम हारे में काम किया है। इसके अलावा कुछ सीरियलों के लिए भी उसकी बात चल रही थी। वह दिल्ली में प्रोडक्शन हाउस के संपर्क में था। फिरौती के रुपयों से उसने महंगा मोबाइल, कपड़े खरीदे और 2.5 लाख रुपए एक डायरेक्टर को भी दिए थे ताकि उसे अच्छा रोल मिल सके।
पुलिस ने कहा वह चुप नहीं थी
एसपी मिश्रा ने कहा कि उनकी पुलिस चुपचाप नहीं बैठी थी, लेकिन प्राथमिकता रामेन्द्र को सुरक्षित घर लाने की थी। जैसे ही रामेन्द्र पकड़ से छूटा, पुलिस तुरंत एक्टिव हो गई और आरोपियों को फिरौती की रकम के साथ गिरफ्तार कर लिया।
स्लाइड्स में है इस अपहरण से जुड़े फोटोज.....