ग्वालियर. डीपीए के छात्र रामेंद्र गुर्जर के अपहरणकर्ताओं तक पुलिस अपहरण के 8 दिन बाद भी नहीं पहुंच पाई है। अब भी पुलिस का दावा है कि अपहरणकर्ता का नाम उनके सामने है और उसके हाथ आने की देर है।
सेना में सूबेदार शैलेंद्र सिंह का बेटा रामेंद्र 2 फरवरी को बहनों के साथ स्कूल गया था। दोपहर में उसके स्कूल की छुट्टी होने से पहले अपहरणकर्ता स्कूल में पहुंचा और मां का एक्सीडेंट होने की बात कहकर उसे अपने साथ ले गया। अपहरणकर्ता उसे आगरा ले गए। वहां से दूसरे गिरोह को उसे सौंप दिया। इसके बाद फिरौती की डील होने के बाद ही रामेंद्र मुक्त हो पाया था। अपहरण के दूसरे दिन से ही पुलिस इस मामले में क्लू मिलने का दावा कर रही थी लेकिन अब रामेंद्र के मुक्त होने के दो दिन बाद भी अपहरणकर्ता का सुराग नहीं मिला है। पुलिस का दावा है कि अपहरण करने वालों के आसपास वह पहुंच चुके हैं। जल्द ही पूरे मामले का खुलासा कर दिया जाएगा।
असफलता दर असफलता
शहर की पुलिस पिछले एक साल में बड़े मामलों की पड़ताल में ज्यादातर फेल ही हुई है। लूट की 3 सनसनीखेज वारदातें और चोरी की बड़ी वारदातों का खुलासा अब तक नहीं हुआ है। अब रामेंद्र अपहरणकांड ने तो पुलिसिंग की पोल ही खोलकर रख दी है।
24 जुलाई को ग्वालियर इंजीनियरिंग कॉलेज के एकाउंटेंट प्रसून माहेश्वरी से 9 लाख की लूट की वारदात में पुलिस लुटेरों तक नहीं पहुंच पाई। यहां पर लूट का लाइव वीडियो भी पुलिस के पास था।
22 नवंबर को बिजौली थानाक्षेत्र में पेट्रोल पंप कर्मचारी संतोष सिंह को गोली मारकर बदमाश 1.67 लाख रुपए लूट ले गए। यहां भी पुलिस के पास लूट का लाइव वीडियो था, लेकिन लुटेरे नहीं पकड़ पाए।
22 दिसंबर को ट्रांसपोर्ट कंपनी के मुनीम बालकिशन शाक्य से 3 लाख रुपए सिटी सेंटर इलाके में बाइक सवार बदमाशों ने लूट लिए थे। यहां पुलिस के पास आरोपी का धुंधला फोटो था लेकिन सुराग हाथ नहीं लगा।
पुराना रिकॉर्ड देखकर बढ़ रही है चिंता
उत्तरप्रदेश के अपहरणकर्ताओं के शहर से रामेंद्र को उठवा लेने के बाद पुलिस ही नहीं शहर के लोग भी चिंतित हैं। पुराना रिकाॅर्ड रहा है कि धौलपुर के डकैत राजेंद्र सेहरोन, झांसी के शहरी बदमाश सूरज जाटव ने इस तरह की वारदातों को अंजाम दिया था। राजेंद्र सेहरोन ने लगातार शिवपुरी और ग्वालियर से एक बालक सहित 4 लोगों का अपहरण करवाया था। वहीं सूरज जाटव एक वारदात के बाद पकड़ा गया। उसने पुलिस को बताया था कि अगर वह पकड़ा नहीं जाता तो लगातार अपहरण की वारदातों को अंजाम देता।
रामेंद्र को भी दिखाए संदेहियों को फोटो
पुलिस अफसरों ने रामेंद्र को भी संदेहियों के फोटो दिखाकर यह जानने की कोशिश की कि उनकी जांच की दिशा ठीक है या नहीं। हालांकि इससे पुलिस को अपहरणकर्ताओं के बारे में दिशा तो मिली है लेकिन अब भी वह दूर बने हुए हैं।
पुलिस इसलिए हो रही फेल
-पुलिस अब पूरी तरह से तकनीक पर निर्भर हो गई है। ऐसे में मुखबिरों से संपर्क भी खत्म हो गया है। मुखबिरों की सूचनाएं पुलिस तक पहुंच नहीं पा रही हैं और पुलिस को बड़े मामलों को सुलझाने में सफलता नहीं मिल पाई।
-शहर की सड़कों पर पुलिस की चेकिंग भी कम दिखाई देती है। जो चेकिंग होती है, वह ट्रैफिक पुलिस की होती है।
-पुलिस का बीट सिस्टम तो शुरू हुआ है लेकिन शहर के बाहरी इलाकों में कौन लोग आ-जा रहे हैं, इसकी पूरी जानकारी बीट में तैनात पुलिसकर्मियों के पास नहीं होती है। इसका ही नतीजा है कि बाहरी लुटेरे और चोर यहां आते हैं और वारदात करके निकल जाते हैं। रामेंद्र का अपहरण करने वाले भी वारदात से पहले इलाके में रैकी करने के लिए रहे थे।
जल्द पकड़े जाएंगे
रामेंद्र अपहरणकांड में महत्वपूर्ण सुराग हाथ आए हैं। अपहरण करने वालों की पहचान हो चुकी है। जल्द ही वह पकड़े जाएंगे।
हरिनारायणचारी मिश्रा, एसपी