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लंदन से सौ साल पहले बनकर आई जयाजी की प्रतिमा को नमन करने बाड़े पहुंचे सिंधिया

5 वर्ष पहले
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ग्वालियर। 100 साल पहले माधौ महाराज ने जो ग्वालियर का विकास किया, वैसा ही विकास आज की जरूरत है। यह बात ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रविवार को महाराज बाड़े पर अपने पूर्वज जयाजी राव सिंधिया की प्रतिमा के शताब्दी समारोह की शुरुआत करते हुए कही।
 
 
लंदन से आई थी यह प्रतिमा
सौ साल पहले महाराज बाड़े पर लंदन से लाकर जयाजी राव सिंधिया की प्रतिमा को स्थापित किया गया था और इसका नाम जयाजी चौक रखा रखा गया था। यह काम उस समय के ग्वालियर स्टेट के महाराज माधौ महाराज ने किया था। प्रतिमा स्थापना के सौ साल पूरे होने पर शताब्दी समारोह आयोजित किया जा रहा है। इसी कार्यक्रम की शुरुआत करने रविवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया बाड़े पहुंचे।
 
पहले गोरखी देवघर की पूजा
महाराज बाड़े पर आते ही सबसे पहले सिंधिया गोरखी स्थित देवघर पहुंचे। यहां पर उन्होंने परंपरागत ढंग से पूजा की। इसके बाद वे महाराज बाड़े पर स्थित जयाजी महाराज की प्रतिमा की माल्यापर्ण करने पहुंचे। अपने पूर्वज को नमन करने के बाद उन्होंने कहा कि आज उसी प्रकार के विकास की जरूरत है, जैसा एक सदी पहले माधौ महाराज ने किया था।
 
100 साल पहले बना था महाराज बाड़ा
माधौ महाराज ने सौ साल पहले इस महाराज बाड़े का निर्माण किया। यही नहीं, उन्होंने ग्वालियर में शिक्षा, स्वास्थ्य से लेकर पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की नींव रखी। आज इन विकास कार्यों की ज्यादा जरूरत है।
 
शताब्दी समारोह मनेगा
जयाजी राव सिंधिया का जन्म 19 जनवरी 1835 को ग्वालियर में हुआ था। 1857 का पहला स्वतंत्रता संग्राम उन्हीं के शासनकाल में हुआ। 51 साल की आयु में जयाजी राव का देहांत 20 जून 1886 में हुआ। उनके उत्तराधिकारी माधौ महाराज ने इस महाराज बाड़े का निर्माण करके जयाजी महाराज की प्रतिमा की स्थापना की।
 
स्लाइड्स में है इस शताब्दी समारोह के फोटोज...
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