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Myth: रावण की कैद से छुड़ाकर इस पर्वत पर लाए गए थे शनि महाराज

5 वर्ष पहले
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ग्वालियर. आज के सामाजिक परिवेश में तनाव ग्रसित जीवन ने भगवान शनि की महत्ता को और भी बढ़ा दिया है। ऐसे में वीकेंड में ग्वालियर के नजदीकी एंती गांव में शनिदेव मंदिर बेहतर स्थान है। माना जाता है कि यह प्रतिमा आसमान से टूट कर गिरे एक उल्कापिंड से निर्मित है।
ज्योतिषी व खगोलविद मानते है कि शनि पर्वत पर निर्जन वन में स्थापित होने के कारण यह स्थान विशेष प्रभावशाली है। महाराष्ट्र के शिगनापुर शनि मंदिर में प्रतिष्ठित शनि शिला भी इसी शनि पर्वत से ले जाई गई है। यह स्थान गोले के मंदिर से तकरीबन 20 किलोमीटर दूर है। इसके पास ही हनुमानजी व भैरव प्रतिमा भी स्थापित है। यहां शनिवार को भंडारे की व्यवस्था भी की जाती है। यहां दिन बिताने पर मानसिक शांति मिलती है।
एक किवंदती यह भी
यहां शनि देव का सबसे प्राचीन मंदिर होने की बात कही जाती है। कहते हैं कि हनुमानजी ने शनिदेव को रावण की कैद से मुक्त कराकर उन्हें मुरैना पर्वतों पर विश्राम करने के लिए छोड़ा था। शनिचरी अमावस्या पर यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
नहीं है रुकने की व्यवस्था
ग्वालियर से गोले का मंदिर से यह नजदीक है। अगर शनिवार को जा रहे हैं तो वहां भंडारा भी होता है। अगर चाहें तो कुछ खाने-पीने का सामान साथ भी ले जा सकते हैं। यहां सुबह पहुंचकर शाम को वापस लौटना ज्यादा ठीक रहेगा। शनिचरा पर रुकने की व्यवस्था नहीं है।
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