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woman creates history in 1 hectare field

5 वर्ष पहले
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ग्वालियर। पति की असमय मौत के बाद मुरैना जिले में पहाड़गढ़ के पास गांव जलालपुरा की एक महिला ने खेत में खुद हल चलाकर नेशनल रिकॉर्ड बना दिया। उसे समाज के लोग विधवा कहकर घर पर बैठने की हिदायत दे रहे थे लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसे राष्ट्रीय कृषि-कर्मण अवॉर्ड के लिए सम्मानित करेंगे। पढ़िए कैसे किया उस महिला ने संघर्ष... 
 
 
 
सिर्फ एक हेक्टेयर खेत में रच डाला कीर्तिमान 
चंबल के जिस इलाके में बेटियों को बोझ समझा जाता है। जहां आज भी बेटियां कोख में मार दी जाती हैं, वहां रेखा के संघर्ष और नेशनल लेबल की कामयाबी को लैंडमार्क माना जा रहा है। रेखा के पति की जब मौत हुई तो समाज ने उसे विधवा कह कर घर बैठने की हिदायत दी थी। रेखा के कंधों पर दो बेटियों और एक बेटे की जिम्मेदारी थी और गुजारे के नाम पर महज 1 हेक्टेयर का खेत। इसी में रेखा को बेटियों और बेटे को पढ़ाना था, परिवार का पेट पालना था और बेटियों की शादी के लिए खर्च भी जुटाना था। 
 
खुद खेतों में हल भी चलाया
खुद अपनी खेती को संभालने बाहर निकली तो रेखा को समाज से भी जंग लड़नी पड़ी। हालात कठिन थे, लेकिन उसने हार नहीं मानी। समाज के असहयोग के चलते कई बार तो गृहस्थी के काम के साथ खुद रेखा को खेतों में हल भी चलाना पड़ा। आखिरकार रेखा की जिद कामयाब हो गई है, अब गांव के लोग भी रेखा पर गर्व कर रहे हैं।
 
खेती में भी पुरुषों से आगे रेखा
थोड़ी-सी जमीन में जमीन में रेखा ने खेती के आधुनिक तौर-तरीके अपनाए और पैदावार बढ़ानी शुरू कर दी। बीते खरीफ सीजन में रेखा ने 1 हेक्टेयर के खेत में करीब 50 क्विंटल बाजरा पैदा कर दिखाया, तो हंगामा हो गया, क्योंकि यह नेशनल एवरेज 15 क्विंटल के तीन गुने से भी ज्यादा है। रेखा को इस उपलब्धि के लिए एक लाख रुपए का चेक और प्रशंसा पत्र खुद प्रधानमंत्री प्रदान करेंगे।
 
फोटो: गिरिराज राजौरिया
 
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