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सालों पुराने इंजन, सफर में कहीं भी रुक जाती हैं ट्रेन
सितंबर महीने में ही 14 दिन के भीतर दो बार फेल हो चुके हैं इंटरसिटी कोटा पैसेंजर के इंजन।
भास्करसंवाददाता|भिंड
भिंड-ग्वालियरट्रेक पर चलने वाली ट्रेन, चाहे एक्सप्रेस हाे या पैसेंजर सभी में 8 से 10 साल पुराने इंजन लगाए जा रहे हैं, इनमें कभी भी खराबी जाती है। इस महीने में भी 14 दिन के भीतर ऐसा दो बार हो चुका है। सिर्फ इतना ही नहीं इससे पहले भी कई दफा ट्रेन के इंजन फेल होने की घटनाएं हुई हैं, बावजूद इसके रेल विभाग समस्या की तरफ ध्यान नहीं दे रहा है।
स्टेशन पर खडे़ इंजन।
यह है नियम
ट्रेनके इंजन में खराबी आती है, तो स्टाफ को सबसे पहले झांसी में बैठे पावर कंट्रोल को सूचना देनी होती है। इसके बाद खराबी दूर करने का प्रयास स्टाफ स्वयं ही करता है। 20 मिनट में अगर इंजन सही नहीं हुआ, तो दूसरा इंजन बुलाकर ट्रेन को रवाना किया जाता है।
कब-कब फेल हुआ ट्रेन का इंजन
}17 सितंबर को ग्वालियर-भिंड पैसेंजर ग्वालियर से रही थी। रास्ते में ऐंतहार और कुसमार गांव के बीच ट्रेन के इंजन में खराबी गई। इस कारण गाड़ी लेट हुई, जिससे यात्रियों को परेशाना होना पड़ा। सिर्फ इतना ही नहीं भिंड स्टेशन पर खड़ी दूसरी ट्रेन भी पैसेंजर के इंजन में खराबी के कारण प्रभावित हुई।
} 3 सितंबर को भिंड रेलवे स्टेशन पर खड़ी इंटरसिटी का इंजन फेल हो गया था। गाड़ी में कोटा पैसेंजर का दूसरा इंजन लगाया गया, तब दो घंटे देरी से ट्रेन रवाना की गई। ऐसे में परेशान हुए यात्रियों ने स्टेशन पर हंगामा भी खड़ा कर दिया।
} 27 अगस्त को कोटा-भिंड ट्रेन सवा दो घंटे देरी से भिंड आई। बताया जाता है कि ट्रेन ग्वालियर स्टेशन से ही देरी से रवाना हुई थी, वहां इसके इंजन में कोई तकनीकी खराबी गई थी।
} 21 अगस्त को कोटा-भिंड पैसेंजर ग्वालियर से चलकर भिंड रही थी। मालनपुर स्टेशन के पास गाड़ी का इंजन फेल हो गया। स्टाफ ने इसे सही करने का प्रयास भी किया, लेकिन उनको सफलता हासिल नहीं हुई। आखिरी में ग्वालियर से दूसरा इंजन बुलाया गया। करीब तीन घंटे देरी से ट्रेन भिंड सकी।