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अब चार घंटे में पहुंचेंगे दिल्ली

7 वर्ष पहले
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यात्रियोंको ग्वालियर से दिल्ली पहुंचने में अब एक से डेढ़ घंटे कम समय लगेगा। सामान्यत: 90 से सौ की स्पीड से चलने वाली एक्सप्रेस सुपरफास्ट ट्रेनें अब दिल्ली से आगरा के बीच 130 से 140 की रफ्तार से दौड़ेंगी। इसके लिए रेलवे ने इंजन और ट्रैक के बीच में बेलास्ट नाम की डिवाइस लगाकर नई दिल्ली से मथुरा के बीच ट्रायल के तौर पर 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तीन दिन स्पेशल ट्रेन दौड़ाई है। यात्रियों को यह तोहफा रेलवे अक्टूबर के अंत तक दे सकती है। फिलहाल यह डिवाइस ग्वालियर से गुजरने वाली चार ट्रेनों के इंजन में प्रयोग के तौर पर लगाई गई है।

रेलवे फिलहाल दिल्ली से आगरा के बीच ट्रैक पर ट्रेन प्रोटेक्शन वर्किंग सिस्टम (टीपीडब्ल्यूएस) के तहत बेलास्ट डिवाइस लगा रही है। यहां रुनकता और बिल्लोचपुरा के बीच ट्रैक पर डिवाइस लगाने का काम अभी बाकी है। यहां 15 अक्टूबर से पहले डिवाइस लगाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। रेलवे ने 18, 19 और 20 सितंबर को 18 कोचों की स्पेशल ट्रेन डिवाइस लगाकर दिल्ली से मथुरा के बीच 130 की स्पीड से ट्रायल के तौर पर दौड़ाई है। इस दौरान कोई व्यवधान नहीं आया और ट्रायल सफल रहा। यह डिवाइस अक्टूबर तक ग्वालियर से गुजरने वाली सभी ट्रेनों के इंजनों में लगा दी जाएगी। इसके बाद दिल्ली से आगरा के बीच एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनें 130 से 140 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी। इस डिवाइस के लगने से जहां ट्रेन हादसों में कमी आएगी, वहीं ग्वालियर से दिल्ली पहुंचने में यात्रियों का एक से डेढ़ घंटा बचेगा। अभी ग्वालियर से दिल्ली पहुंचने में साढ़े चार से पांच घंटे लगते हैं। इसके बाद झांसी मंडल में ट्रैक पर डिवाइस लगाने का काम शुरू किया जाएगा। फिलहाल प्रयोग के तौर पर ग्वालियर से गुजरने वाली श्रीधाम एक्सप्रेस, महाकौशल एक्सप्रेस, गोवा एक्सप्रेस और भोपाल एक्सप्रेस में यह डिवाइस लगाई गई है।

जर्मनीकी कंपनी ने बनाई है डिवाइस: बेलास्टडिवाइस जर्मनी की अनसाल्डो कंपनी ने बनाई है। रेलवे के कंप्यूटर में सारे प्रोग्राम कंपनी के इंजीनियरों ने ही अपलोड किया है। डिवाइस लगाने का ठेका भी अनसाल्डो कंपनी को ही दिया गया है।

डिवाइस के संकेतों का पालन नहीं किया तो इंजन हो जाएगा बंद

यदिइंजन के ड्राइवर ने डिवाइस के संकेतों का पालन नहीं किया तो इंजन बंद हो जाएगा और सिग्नल पर पहुंचने के सौ मीटर पहले ट्