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व्यायाम का प्रशिक्षण देकर भूली सरकार

7 वर्ष पहले
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प्रदेशकेस्कूलों में व्यायाम शिक्षकों के पद भरने के लिए सरकार एक वर्षीय सीपीएड (सर्टिफिकेट इन फिजिकल एजुकेशन) और दो वर्षीय डीपीएड (डिप्लोमा इन फिजिकल एजुकेशन) के दो कोर्स चलाती है। इन कोर्सेस में हर साल 40 शिक्षक सीपीएड और 35 शिक्षक डीपीएड करने पहुंचते हैं। ट्रेनिंग के खर्च और प्रशिक्षण अवधि में वेतन देने के चलते सरकार पर हर साल तीन करोड़ का बोझ पड़ता है, लेकिन इस प्रशिक्षण का कोई फायदा नहीं होता क्योंकि टीचर्स को पदों पर भेजा ही नहीं जाता।

प्रदेश में व्यायाम शिक्षकों के लिए बाकायदा ट्रेनिंग चलाई जाती है, लेकिन इसके बावजूद स्कूलों में ये पद खाली पड़े हैं। वजह सिर्फ इतनी है कि प्रशिक्षण देने के बाद सरकार भूल ही जाती है कि ये शिक्षक अब व्यायाम शिक्षक के तौर पर भेजे जा सकते हैं। हर साल सरकार इन टीचर्स के प्रशिक्षण पर तीन करोड़ रुपए खर्च करती है, पर इसका कोई फायदा नहीं मिल पाता है। पहले सहायक शिक्षकों को ही प्रशिक्षण दिया जाता था, लेकिन 2005 से शिक्षाकर्मियों और 2007 से अध्यापक संवर्ग को भी इसमें शामिल कर लिया गया। पिछले सात साल में 350 शिक्षक यह कोर्स कर चुके हैं, लेकिन पदोन्नति अटकी हुई है। प्रदेश के 1200 से ज्यादा हायर सेकंडरी स्कूलों में पद रिक्त हैं, लेकिन इन शिक्षकों को व्यायाम शिक्षक नहीं बनाया जा रहा है।