यहयोजनाप्रदेश के 81
भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने आरएपीडीआरपी को 2008 में लाॅन्च किया था। योजना का पार्ट बी 31 दिसंबर 2014 को बंद होना था, लेकिन स्टीयरिंग कमेटी की अनुशंसा पर इसका समय बढ़ाकर जुलाई 2015 कर दिया गया। वहीं पार्ट 15 मार्च तक बंद होना है। इसके तहत प्रदेश में पुराने बिजली उपकरणों के स्थान पर नए उपकरण लगाने थे। प्रदेश भर में आरएपीडीआरपी की धीमी लचर गति ने इस योजना के तहत काम तो किया, लेकिन जितना होना था, वैसा नहीं हो सका। योजना पूरी करने की सबसे बड़ी हानि यह हुई कि प्रदेश भर में बिजली के जो नए उपकरण मंगा
यहयोजनाप्रदेश के 81 टाउन्स (कस्बों) में चल रही है। इस योजना का उद्देश्य था कि एटीएंडसी लॉस 15 प्रतिशत पर जाए। इसके क्रियान्वयन के लिए मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को 31 टाउन के लिए 833.39 करोड़, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 26 टाउन के लिए 622.45 करोड़ पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 23 टाउन के लिए 538.76 करोड़ रुपए अनुदान के रूप में दिए गए थे।
इंस्पेक्शनएजेंसीज का धोखा
मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में आरएपीडीआरपी के कामों का इंस्पेक्शन करने का सबसे पहले दायित्व व्याएंट्स सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा था, लेकिन यह कंपनी बीच में ही काम छोड़कर चली गई। इसके बाद इंस्पेक्शन का काम फीडबैक को सौंपा गया। फीडबैक ने इसके लिए कंपनी से 14 करोड़ रुपए लिए, लेकिन रिपोर्ट सही नहीं बनाई।
^एसई जिम्मेदार
आरएपीडीआरपीमें ग्रांट का लोन में तब्दील होने की ज्यादा जानकारी नहीं है। वैसे भी एटीएंडसी लॉस करने का दायित्व संबंधित शहर के एसई का होता है और वही इसके लिए जिम्मेदार हैं।
डीपीअहिरवार, सीजीएम,आरएपीडीआरपी
बर्बादी का आरएपीडीआरपी
81 टाउन्स में चल रही है योजना