प्रदेशके अतिथि वि
नियम का भी उल्लंघन
सेमेस्टरसिस्टम में एक विषय की 90 कक्षाएं कार्य दिवस में लगना अनिवार्य हैं। लेकिन एक विषय को दो दिन पढ़ाने के कारण दूसरे विषय की कक्षाएं 90 दिन लगने का नियम टूट रहा है। अंचलों के कॉलेजों में यूजी-पीजी के एक विषय के लिए एक ही अतिथि विद्वान है। 3 से ज्यादा कक्षाओं पर एक अतिथि विद्वान होने के कारण परेशानी हो रही है।
प्रदेशके अतिथि विद्वानों के भरोसे चल रहे अंचलों के कॉलेजों में छात्र पढ़ाई की गुणवत्ता के साथ ही प्रायोगिक ज्ञान से भी दूर हो रहे हैं। इसकी वजह है प्रदेश सरकार द्वारा अतिथि विद्वानों को भुगतान की बाध्यता, जिसके चलते कालेजों का टाइम टेबल ही गड़बड़ा गया है। इस वर्ष उच्च शिक्षा विभाग ने अतिथि विद्वानों का मानदेय तो बढ़ाया, लेकिन तीन कक्षाओं से ज्यादा पीरियड लेने पर उनके भुगतान पर रोक लगा दी है। प्रदेश के कई कॉलेजों में यूजी और पीजी के लिए एक ही अतिथि विद्वान नियुक्त है। ऐसे में वह तीन से ज्यादा पीरियड नहीं पढ़ा रहे, जिसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
तीन पीरियड की बाध्यता खत्म हो
छात्रोंऔर अतिथि विद्वानों के हितों को देखते हुए तीन पीरियड की बाध्यता समाप्त की जाए। उन्हें यूजीसी के अनुसार निश्चित 25 हजार रुपए का मानदेय दिया जाए।
डॉ.देवराज सिंह, प्रदेशाध्यक्ष,अतिथि विद्वान महासंघ, मप्र
अभीभर्ती की कार्रवाई चल रही है
सरकारीकॉलेजों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में 1800 सहायक प्राध्यापकों की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद अंचलों के कॉलेजों में शिक्षकों की कमी लगभग दूर हो जाएगी।
दीपकजोशी, राज्यमंत्री, उच्च शिक्षा विभाग, मप्र
11 पीरियड और 2 अतिथि विद्वान
ग्वालियर जिले के शासकीय छत्रसाल महाविद्यालय पिछोर में इतिहास, समाजशास्त्र, हिन्दी, अर्थशास्त्र, बॉटनी, अंग्रेजी विषय में पीजी तक कॉलेज हैं। वहीं फिजिक्स, केमेस्ट्री, जूलॉजी, बॉटनी में यूजी तक की कक्षाएं लगती हैं। यहां पर कॉलेज के टाइम टेबल के अनुसार इतिहास विषय के 11 पीरियड लगना जरूरी हैं। लेकिन दो अतिथि विद्वान द्वारा सिर्फ 6 पीरियड ही लिए जा रहे हैं। समाजशास्त्र विषय में भी यही स्थिति है। 11 कक्षाएं केवल हिन्दी लिटरेचर की लग रही हैं।