\"सहें नहीं डटकर करें मुकाबला\'
अगरआप किसी भी तरह के अत्याचार को सहकर उसे बढ़ावा दे रहे हैं तो यह गलत है। इससे बेहतर है कि आप इस हिंसा के खिलाफ आवाज उठाएं। इसके लिए आपको खुद पहल करनी हाेगी। आज समाज में लड़कियों और महिलाओं पर होने वाले अत्याचार को रोकने के लिए खुद महिला और लड़कियों को पहल करनी होगी। तभी समाज में होने वाली घटनाओं को रोका जा सकता है। यह बात मुख्य अतिथि पूर्व न्यायमूर्ति बृज किशोर दुबे और मुख्य वक्ता मेजर डॉ. आशा माथुर ने सोमवार को कही। वे महिलाओं की सुरक्षा और कानून अधिकार विषय पर सोमवार को केआरजी कॉलेज में दो दिवसीय वर्कशॉप में संबोधित कर रहे थे। इसमें उन्होंने अपने अनुभव साझा किए। साथ ही सेल्फ डिफेंस के बारे में जानकारी दी इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक डॉ. अमिता लछवानी सहित अन्य फैकल्टी और स्टूडेंट्स मौजूद रहे। पहले दिन कुछ स्टूडेंट्स और टीचर्स ने अनुभव शेयर किए। संचालन डॉ. राजरानी शर्मा ने किया।
Áटेंपो मेंलगाई डांट: एकदिन मैं टेंपो से कॉलेज जा रही थी तो मेरे बगल में बैठा लड़का बार-बार टच करने का प्रयास कर रहा था। लड़के की इस हरकत पर जैसे ही मैं उस पर चिल्लई वो डर के मारे चलते टेंपो से उतरकर भाग गया। -उपासना मिश्रा, स्टूडेंट
Áडांटने सेही परेशानी खत्म: एकदिन मार्केट से लौटते वक्त दो बाइक सवार ने मेरा पीछा करना शुरू कर दिया, लेकिन मैंने उन्हें रूकने की चुनौती दी और इसके बाद जैसे ही मैंने मोबाइल फोन कॉल करने के लिए निकाला, वो डरकर भाग गए। -भूमिका डाबरानी, स्टूडेंट
केआरजी कॉलेज में वर्कशॉप को संबोधित करतीं मेजर डॉ. आशा माथुर। फोटो: भास्कर
लड़के की कर दी पिटाई
पिछले साल की बात है मैं अपने परिवार के साथ रामलीला देखने गई। वहां एक लड़के ने कमेंट किया। मुझे गुस्सा आया फैमिली मेंबर्स ने कहा कि चलो यहां से, लेकिन मैंने वहीं उस लड़के की पिटाई की। इसके बाद हम लोग रोज रामलीला देखने गए, लेकिन दोबारा किसी की हिम्मत नहीं हुई। -पूजा नामदेव
डोमेस्टिकवायलेंस को रोका
मैं अपने आस-पास किसी भी तरह के वायलेंस को बर्दाश्त नहीं करती। एक बार मेरे घर पर काम करने वाली मेड को उसका पति सड़क पर खुलेआम मार रहा था। मैंने पुलिस को कॉल किया। इसके बाद उसका पति सुधर गया।
-प्रो. चारू चित्रा, इंग्लिशविभाग
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