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- \"बच्चों को समझने टीचर्स रखें इमोशनल जुड़ाव\'
\"बच्चों को समझने टीचर्स रखें इमोशनल जुड़ाव\'
बच्चोंके साथ टीचर का संबंध महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए बच्चों के साथ इमोशनल जुड़ाव होना आवश्यक है। जब तक बच्चों से टीचर का संबंध भावनात्मक नहीं होगा तब तक बच्चों के मन में छिपी बात पता लगाना एवं उसके सीखने की ललक विकसित करना संभव नहीं है।
यह बात आज आईटीएम ग्लोबल स्कूल में नेक्स्ट एजूकेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के वाइस प्रेसीडेंट डाॅ. धीरज मेहरोत्रा ने कही। वे सोमवार को स्कूल में क्वालिटी टीचिंग एंड एक्सीलेंस विषय पर आयोजित वर्कशॉप को संबोधित कर रहे थे। इसमें शहर के 17 स्कूलों के टीचर्स ने भाग लिया। तीन सत्रों में आयोजित इस वर्कशॉप के पहले सत्र में शिक्षकों को इफेक्टिव टीचिंग टेक्निक्स और कीज टू क्लासरूम एक्सीलेंस के बारे में बताया गया। इस अवसर पर आईटीएम ग्लोबल स्कूल की चेयरपर्सन रुचि सिंह, एडवाइजर श्वेता मिश्रा, प्राचार्य अरविंद सिकरवार आिद मौजूद रहे।
बैक बेंचर रहें
Áक्लासरूम का लेआउट इस तरह होना चाहिए कि कम से कम बच्चे बैक बेंचर रहें।
Áपढ़ाते समय टीचर्स बच्चों के फेस एक्सप्रेशंस को नोट करें।
Áटीचर को साइबर स्पेस बनाने पर जोर देना चाहिए। इसके अंतर्गत टीचर्स अपनी स्किल्स को यूटूब, फेसबुक, लिंक्डइन के माध्यम से बच्चों तक पहुंचा सकते हैं।
Áबच्चों से थ्योरोटिक्ल से ज्यादा प्रैक्टिकल नॉलेज पर ध्यान देने की बात कहें।
आओ मिलकर सीखंे
Áटीचर को हमेशा क्लास के लिए पूरी तरह तैयार होना चाहिए।
Áक्लास लेने से पहले बच्चों की मानसिकता, ध्यानाकर्षण और उनके अंतरमन का परीक्षण आवश्यक है।
Áअच्छा टीचर बनने के लिए बच्चों की सभी चीजों का भी आब्जर्वेशन करें।
Áटीचर्स आओ साथ मिलकर सीखें की थ्योरी पर काम करें।
Áटीचर को अभिभावकों से संपर्क में रहना चाहिए।
वर्कशॉप में टीचर्स को पढ़ाई के टिप्स देते एक्सपर्ट डॉ. धीरज मेहरोत्रा।
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