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हर साल होती है तीस से अधिक बच्चों की मौत

7 वर्ष पहले
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वर्ष2014 में थैलेसीमिया से पीड़ित चार मरीजों की मौत ग्वालियर में हो चुकी है, जबकि भोपाल में तीन। प्रदेश की विभिन्न थैलेसीमिया सोसायटी से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश भर में हर साल 30 से अधिक बच्चों की मौत हो जाती है।

यह है दवा का खर्च

एस्योरटेबलेट - नाेवार्टिस - 1800 रुपए।

एकपैकेट में 30 टेबलेट आती हैं। यह दवा बच्चों को दिन में एक या दो बार खानी पड़ती है।

डेजीरॉक्सटेबलेट - सिपला - 950 रुपए

इसकीडिब्बी में 30 टेबलेट आती हैं। यह दवा बच्चों को दिन में एक या दो बार खाना पड़ती है।

ब्लडट्रांसफ्यूजन के समय फिल्टर - 600 रुपए

>इसके अलावा कैल्शियम की टेबलेट भी खरीदनी पड़ती हैं।

> अस्पतालों से केवल फोलिक एसिड टेबलेट दी जाती हैं

> ग्रामीण क्षेत्रों से अस्पताल तक आने-जाने में भी 400-500 रुपए खर्च हो जाते हैं।

^प्रदेश मेंपांच हजार बच्चे थैलेसीमिया से पीड़ित

प्रदेशमें पांच हजार से अधिक बच्चे थैलेसीमिया से पीड़ित हैं। भाजपा शासित कई राज्यों में दवा तथा जांच की फ्री सुविधा है, लेकिन मप्र में सुविधा होने के कारण दिक्कत रही है।

साजिदखान, अध्यक्षथैलेसीमिया सोसायटी, भोपाल

^नि:शुल्क दवाकी व्यवस्था नहीं

जिलेमें 140 बच्चे थैलेसीमिया से पीड़ित हैं। इन बच्चों को ब्लड में आयरन कम करने के लिए डेजीरोक्स टेबलेट दी जाती है, जो बाजार से खरीदनी पड़ती है।

केएलभंभानी, अध्यक्ष,थैलेसीमिया सोसायटी ग्वालियर

दो प्रकार का होता है थैलेसीमिया

थैलेसीमियादो प्रकार का होता है। यदि पैदा होने वाले बच्चे के माता-पिता दोनों के जींस में माइनर थैलेसीमिया होता है, तो बच्चे में मेजर थैलेसीमिया हो सकता है। किंतु पालकों में से किसी एक ही में माइनर थैलेसीमिया होने पर बच्चे को खतरा नहीं होता। माइनर थैलेसीमिया का शिकार व्यक्ति सामान्य जीवन जीता है और उसे कभी इस बात का आभास तक नहीं होता कि उसके खून में कोई दोष है।

थैलेसीमिया से बचने के उपाय

>रक्त परीक्षण कराकर इस रोग की उपस्थिति की पहचान कर लेनी चाहिए।

> शादी करने से पूर्व लड़का एवं लड़की के रक्त का परीक्षण अवश्य कराना चाहिए।

> नजदीकी रिश्ते में शादी-विवाह करने से परहेज रखना चाहिए।

> गर्भधारण के चार महीने के अंदर भ्रूण का परीक्षण कराना चाहिए।

> भ्रूण में थैलेसीमिया के लक्षण पाते ही डॉक्टर गर्भपात कराने की सलाह देत