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अमानक दवाओं पर 1722 मौतों के बाद भी चुप्पी

6 वर्ष पहले
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सैकड़ोंमरीजों की मौत के बाद से दवाएं देने के पहले जांच पर जोर देने के लिए केंद्र राज्य सरकार ने कई नियम बनाए, लेकिन इसके बाद भी विभाग की नींद नहीं खुली और लापरवाही बरती जा रही है। दागी दवा कंपनियों पर कार्रवाई के लिए भोपाल से हरी झंडी मिलने का इंतजार किया जा रहा है।

नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे द्वारा अमानक दवाओं की जानकारी मांगने पर विभाग उसे छिपाता रहा, जबकि जांच में जाहिर हो चुका है कि अमानक दवाएं जान ले रही हैं। डायरेक्टोरेट ऑफ सेंट्रल हेल्थ सर्विसेज द्वारा एक आरटीआई में दी गई जानकारी में खुलासा हुआ है कि पिछले चार साल में 1722 लोगों की मौत हो चुकी है। इसी को ध्यान में रखकर मरीजों को दवाएं देने के पहले उनकी पुख्ता जांच करने के नियम बनाए गए थे।