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मृतक तथा सरकारी कर्मचारियों को पेमेंट

7 वर्ष पहले
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ग्रामपंचायत दयेली में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत हुए कार्यों में लाखों रुपए का घपला हो गया। सरपंच जगदीश सिंह गुर्जर चार वर्ष की अवधि के दौरान अलग-अलग सचिवों ने ग्राम पंचायत के अंतर्गत मुरम रोड बनाने, खरंजा पशु अवरोधक खंती जैसे कार्यों में कई मृतकों, संपन्न लोगों तथा सरकारी कर्मचारियों के नाम से भुगतान ले लिया। इसके लिए लोगों के फर्जी जॉब कार्ड भी तैयार कराए गए। इसी आधार पर बैंक में खाते खुलवाकर उनसे रुपए निकाल लिए गए।

इस गड़बड़ी का खुलासा तब हुआ, जब व्यवसायी राम निवास सिंह को अपने पिता बेताल सिंह के नाम से 8964 रुपए स्टेट बैंक ऑफ इंदौर के अकाउंट से निकाले जाने का पता चला। जब उन्होंने इसकी विस्तार से जानकारी ली, तो पता चला कि सचिव सरपंच ने बेताल सिंह सहित गांव के कई अन्य बुजुर्गों के नाम से भी पैसा आहरण कर लिया है। इनमें नक्टू चाय वाले के नाम से 31 हजार 982, 73 वर्षीय सेवाराम के नाम से 21 हजार 216 रुपए, 91 वर्षीय मंगल सिंह के नाम से 20 हजार 424 रुपए शामिल हैं। इतना ही नहीं इनमें ऐसे सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं, जो मप्र के बाहर पोस्टेड हैं। रामनिवास ने इसकी जनपद पंचायत मुरार सहित जिला पंचायत सीईओ को भी शिकायत की, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला।

एफआईआर तथा रिकवरी का नियम

मनरेगा के तहत धांधली करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। इस मामले में दोषी के खिलाफ जुर्माना, एफआईआर पद से बर्खास्त करने जैसी कार्रवाई की जाती है। वहीं पंचायती राज की धारा 40 के तहत भी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। इसमें जांच कराने से लेकर, जुर्माना, एफआईआर, पद से बर्खास्त करने तथा रिकवरी तक का प्रावधान है।