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कैंपस प्लेसमेंट घटे तो बीई में कम हो गए लोकल स्टूडेंट्स
शहरके प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेजों से स्टूडेंट्स का मोह धीरे-धीरे भंग होता जा रहा है। अब शहर के स्टूडेंट्स बीई करने बजाय आईआईटी में जाना पहली प्राथमिकता देते हैं। इसकी वजह है कि शहर के स्टूडेंट्स जॉब के लिहाज से आईआईटी को ज्यादा सिक्योर मानते हैं। इंजीनयिरिंग के प्रति क्रेज कम होने की एक वजह पिछले तीन कैंपस प्लेसमेंट के लिहाल से बेहतर नहीं होना भी है। मंदी की वजह से पिछले तीन साल में प्लेसमेंट में 50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट हुई है।
इंजीनियरिंग के छात्र इसे लेकर खासे परेशान हैं। इसलिए कॉलेजों में स्थानीय स्टूडेंट्स की संख्या में कमी आई है, जबकि कॉलेज में बाहरी स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ी है। वर्ष 2012 में जहां शहर के इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट में 65 कंपनी रिक्रूटमेंट के लिए कैंपस आई थी वहीं 2013 में इसकी संख्या 43 तक सिमट गई। इस वर्ष 2014 में कुल 30 कंपनियां रिक्रूटमेंट के लिए कैंपस आईं हैं।
65%बाहर के स्टूडेंट्स
शहर के इंजीनियरिंग कॉलेज में 35% स्थानीय और 65 % बाहर के स्टूडेंट्स हैं। ज्यादातर स्टूडेंट्स जम्मू कश्मीर, उत्तरप्रदेश, बिहार और नॉर्थ ईस्ट के हैं।
Áएजुकेशन के लिए बेहतर प्लेटफॉर्म।
Áअच्छी फैकल्टी बड़ी वजह है
Áआईआईटी एडमिशन के बाद स्टूडेंट्स सिर्फ स्टडी को फोकस करते हैं।
Áस्टूडेंट्स को बेहतर एक्सपोजर।
कंपनी देती हैं अनुभव को वरीयता
जानकारों की मानें तो नौकरियों के सापेक्ष बड़ी संख्या में छात्र तकनीकी शिक्षा की डिग्री और डिप्लोमा ले रहे हैं। इससे कंपनी के पास विकल्प रहते हैं और वो डिग्रियों के बीच प्रतिभा को चुनती है। दूसरी ओर आर्थिक मंदी के चलते भी कंपनियों में रिक्त पदों को नहीं भरा जा रहा है। साथ ही फ्रेशर को चुनने के बजाय एक दो साल के अनुभव वाले युवाओं को वरीयता दी जा रही है।
सॉफ्ट स्किल पहली डिमांड
एमआईटीएस के ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिसर विक्रम राजपूत का कहना है कि प्लेसमेंट में कंपनी की पहली डिमांड सॉफ्ट स्किल अौर कम्युनिकेशन स्किल होती है। इसके बाद ही स्टूडेंट्स की टेक्निकल स्किल को परखा जाता है। कैंपस प्लेसमेंट में कंपनी की इन कसौटी पर स्टूडेंट्स खरे नहीं उतर रहे हैं, जिससे प्लेसमेंट घटा है।
वर्ष कुल कंपनियां हाई पैकेज
वर्ष2014 30 कंपनियां 7.5लाख
वर्ष2013 43 कंपनियां 9.6लाख
वर्ष2012 65 कंपनियां 9.4लाख
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