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कोई स्टेशन पर सोया, तो कोई रिश्तेदार के घर गया
शहरमें हुई 60वीं राज्य स्तरीय शालेय तलवारबाजी स्पर्धा का समापन भी लापरवाहीपूर्ण ही रहा। ट्रेन रिजर्वेशन की सही जानकारी नहीं होने पर खिलाड़ी एक दिन पहले ही ट्रेन में बैठ गए। हबीबगंज स्टेशन से बैठे इन बच्चों को इस गफलत के कारण मुख्य स्टेशन पर उतार दिया गया। ये सभी बच्चे मुख्य स्टेशन पर रातभर परेशान होते रहे। यहां बच्चों और उनके अभिभावकों की टिकट को नहीं पढ़ने की गलती के साथ-साथ आयोजन प्रबंधन की लापरवाही भी उजागर हुई।
जल्दबाजीमें तारीख भूल गए
यहांसे जाने वाले 45 खिलाड़ियों का रिजर्वेशन 13 सितंबर का था। जल्दी जाने की आपाधापी में इन्होंने 12 तारीख को ही ट्रेन पकड़ ली। टीटी ने टिकट देख सभी को मुख्य स्टेशन पर उतार दिया।
अभिभावककैसे सकते हैं
कुछखिलाड़ियों की शिकायत पर डीबी स्टार टीम भोपाल रेलवे स्टेशन पहुंची। वहां कुछ खिलाड़ियों के अभिभावक भी मौजूद थे। अभिभावकों का कहना था कि उन्हें अपने बच्चों को परीक्षा दिलाना है, इसलिए वे अपने बच्चों को जल्दी ले जा रहे हैं। नियमानुसार किसी भी स्पर्धा में बच्चों की जिम्मेदारी कोच और मैनेजर की होती है।
रिश्तेदारों और परिचितों के घर गुजारी रात
भोपाल में आयोजित तलवारबाजी की इस प्रतियोगिता के लिए ग्वालियर के पद्मा विद्यालय, भारतीयम स्कूल, रेडिएंट स्कूल, डीपीएस सहित लगभग आधा दर्जन स्कूलों से आधा सैकड़ा से अधिक बच्चे रवाना किए गए थे। इसमें अधिकतर लड़कियां थीं। अधिकारियों ने लड़कियों की सुरक्षा की परवाह किए बिना ही उन्हें ट्रेन में बैठा दिया। बाद में जब खिलाड़ी भोपाल स्टेशन पर उतरे, तो उनके रुकने की कोई व्यवस्था नहीं थी। अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद रात लगभग पौने ग्यारह बजे सहायक संचालक स्तर के अधिकारी इन बच्चों को लेने के लिए स्टेशन पहुंचे। इसी बीच कई खिलाड़ियों ने ग्वालियर स्थित अपने परिजनों को फोन कर दिया। रात के समय परिजन भी इसी चिंता में रहे और उन्होंने रिश्तेदारों परिचितों के माध्यम से भोपाल में छात्राओं की मदद कराई। ग्वालियर निवासी सतीश नारंग ने भोपाल में अपने रिश्तेदारों को फोन कर छह खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था कराई।
कुछ गए, कुछ को ठहराया
बच्चों के साथ आए एक अधिकारी ने बताया कि ट्रेन की गफलत में स्टेशन पर उतरे 45 में से 20 खिलाड़ी अपने गंतव्य की ओर चले गए हैं। जो शेष रहे, उनके ठहरने की व्यवस्था शिक्षक सदन में की गई है। डी