ग्वालियर. टाइम पर स्कूल नहीं पहुंचने वाले टीचरों को अब अपनी आदत बदलनी होगी। छात्र संख्या के मामले में हेडमास्टर भी हेराफेरी नहीं कर सकेंगे। ऐसी ही स्थिति मध्याह्न भोजन की रहेगी। ऐसा सरकार द्वारा अपने ही प्राइमरी-मिडिल स्कूलों पर
मोबाइल से निगरानी रखने के कारण होगा। एजूट्रेक के नाम से यह प्रोजेक्ट अगले माह चालू होगा। गुरुवार को मान सभागार में इसको लेकर छह घंटे तक ट्रेनिंग हुई, इसमें यूनिसेफ के एक्सपर्ट मौजूद थे।
देश के चार राज्यों के आठ शहरों में यूनिसेफ की मदद से मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू हो गया है। इनमें मध्यप्रदेश से ग्वालियर मंडला जिले को लिया गया है। गुरुवार को यूनिसेफ के राष्ट्रीय सलाहकार गणेश निगम, संभागीय सलाहकार इम्तियाज अली आदि ने स्कूल शिक्षा विभाग के 60 से ज्यादा अफसरों को ट्रेनिंग दी। इस प्रोजेक्ट से जिले के 1 हजार 967 हेडमास्टर, इतने ही स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य अध्यक्ष तथा इन स्कूलों पर निगरानी करने वाले अफसर सीधे जुड़ेंगे।
तैयारहो रहे मोबाइल पर पूछे जाने वाले प्रश्न: स्कूलमैनेजमेंट, हेडमास्टर के मोबाइल पर एसएमएस भेजकर हर दिन सवाल पूछे जाएंगे। अभी 20 सवाल तैयार हो गए हैं, सरकार की सलाह पर तीस से ज्यादा सवाल और तैयार हो रहे हैं। एजूट्रेक के सॉफ्टवेयर में स्टाफ के छुट्टी पर होने, नेटवर्क एरिया से मोबाइल बाहर होने, मोबाइल स्विच ऑफ होने जैसे ऑप्शन पर भी होमवर्क किया गया है। प्रोजेक्ट चालू होने पर विभाग को जानकारी तत्काल ऑनलाइन भी मिल सकेगी।
फरवरी तक लागू होगा मोबाइल से हाजिरी का सिस्टमटीचरों की हाजिरी के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने एक और एप तैयार किया है। यह भी मोबाइल से ऑपरेट होगा। अभी इस तरह की व्यवस्था इंदौर उज्जैन में है। विभाग इन दोनों जिलों में दो माह तक प्रोजेक्ट का होमवर्क कर रहा है। इसके बाद फरवरी में इसे प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा। स्कूलों में सामान्य तौर पर देरी से आने वाले टीचर इस सिस्टम का विरोध भी कर रहे हैं।