मानव शरीर ऊर्जा का भंडार
ग्वालियर|मानव शरीरऊर्जा का भंडार है। इस ऊर्जा का उपयोग सद्कार्यों में करते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। जरूरत सिर्फ उस ऊर्जा को जगाने तथा उसे सद्कार्यों में लगाने की है। यह विचार जैन श्वेतांबर तेरापंथ के मुनिश्री आलोक महाराज ने समाधिया कॉलोनी में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मुनिश्री आलोक महाराज ने कहा कि व्यक्ति व्यर्थ के कार्यों में अपना धन और समय व्यर्थ करता रहता है। जब भी हम प्रभु, सदगुरु और बड़ों के चरणों में सिर रखते हैं तथा चरण स्पर्श करते हैं तो हमें उनकी ऊर्जा प्राप्त होती है। संजीव पारख ने बताया कि आचार्य महाश्रमण के ग्वालियर आगमन की तैयारियों के चलते 12 दिसंबर को रात्रि आठ बजे जैन श्वेतांबर उपाश्रय भवन में बैठक आयोजित की जाएगी।