\"मानवता के साथ अागे बढ़ो\'
जीवनमें तुम खूब उन्नति करो लेकिन ध्यान रखो कि आगे बढ़ने की इस दौड़ में कहीं इंसानियत की हत्या तो नहीं हो रही। तुम मानवता को हृदय में धारण करते हुए आगे बढ़ो। यह विचार राष्ट्र संत मुनिश्री पुलक सागर ने बुधवार को जैन छात्रावास में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
मुनिश्री ने पूछा कि तुम यह बताओ कि आत्मा शरीर के किस भाग में रहती है। जैसे एक गिलास दूध हो तो क्या तुम यह बता सकते हो कि गिलास के किस हिस्से में घी होगा। तिल के कौन से हिस्से में तेल होगा, गन्ने के कौन से हिस्से में मिठास होगी। ऐसे ही इस शरीर में जहां-जहां चैतन्यता है, दर्द का अहसास है, वहां-वहां आत्मा का वास है। मतलब पैर की अंगुली से लेकर सिर तक हमारे शरीर में आत्मा का वास होता है।
मुनिश्री ने कहा कि कभी-कभी दुख का आना भी जरूरी है। यह दुख हमें अपने परमात्मा से मिलाता है क्योंकि व्यक्ति भगवान का नाम सुख से ज्यादा दुख में लेता है।