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ड्रग इंस्पेक्टर से करानी थी दवाओं की जांच

7 वर्ष पहले
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डेढ़ महीने पहले भी हुई परेशानी

डेढ़महीने पहले भी आरएल तथा डीएनएस लगाने से कई मरीजों की हालत बिगड़ गई थी। अधीक्षक ने इस मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की थी, लेकिन जांच बेनतीजा रही। यह पता नहीं चल सका कि किस कारण से मरीजों को परेशानी रही है। इसकी जानकारी इंदौर स्थित डायरेक्टोरेट को भी दी गई थी।

^मरते-मरते बचा

आईवीफ्लूड लगाने के पांच मिनट के अंदर ही मेरी सांस उखड़ने लगी। ऐसे लगा जैसे कि अभी सांस थम जाएगी। अगर ऑक्सीजन हाेता तो शायद जान बच पाती।

भूरेसिंह, मरीज

^घटिया दवाएंहैं

ड्रिपलगते ही मुझे घबराहट होने लगी, जब तक परिजन डॉक्टरों काे बुलाते तब तक मैं बेहोश होने लगा। मैं तो उल्टी-दस्त का इलाज कराने आया था, मुझे क्या पता था घटिया दवा के कारण मेरी जान खतरे में पड़ जाएगी।

फूलसिंह, मरीज

^सभी दवाओंकी जांच हो

बीमाअस्पताल में आने वाली दवाएं घटिया हैं। यहां तो मरीजों की जान से खिलवाड़ किया रहा है। यहां सप्लाई होने वाली सभी दवाओं की जांच होनी चाहिए, नहीं तो किसी की जान चली जाएगी।

मालती,मरीज

क्या कहते हैं मरीज

इंदौर से होती है आईवी फ्लूड की सप्लाई

जिसडीएनएस आरएल से मरीजों को रिएक्शन हो रहा है, वह इंदौर स्थित डायरेक्टोरेट से सप्लाई किया जाता है। इस बार जो डीएनएस आरएल सप्लाई किया गया है, वह हरियाणा की बैक्सर कंपनी का है। हाल ही में 1500 बोतल आरएल 2000 बोतल डीएनएस की सप्लाई अस्पताल में की गई हैं।

अस्पताल में भर्ती हैं 33 मरीज

बीमाअस्पताल में अभी 33 मरीज भर्ती हैं। ग्लूकोज की बोतल चढ़ाने से मरीजों की हालत बिगड़ने की जानकारी मिलते ही सभी मरीज खौफ में हैं। कोई भी मरीज अब ड्रिप लगवाने को तैयार नहीं है। अस्पताल में तीन वार्ड हैं, मेडिसिन, सर्जिकल गायनिक इन तीनों वार्डों में मरीज उनके अटेंडेंट के बीच इस मामले की चर्चा चल रही है।

बीमारी से ज्यादा छत का डर

कईमरीजों को बीमारी से ज्यादा छत से प्लास्टर गिरने का डर सता रहा है। वार्ड की छत में दरारें आने के कारण कभी भी मरीजों पर प्लास्टर गिर पड़ता है। कई मरीजों ने तो इस कारण अपने पलंग भी सरका लिए हैं। यही नहीं वार्ड में कूलर पंखे भी खराब होने से मरीज परेशान हैं।