बिना ट्रांजेक्शन खाते से निकले रुपए
शिंदेकी छावनी निवासी रवि गुप्ता उनकी प|ी कुसुम देवी का महाराष्ट्र बैंक की पाटनकर बाजार स्थित ब्रांच में ज्वाॅइंट अकाउंट है। श्री गुप्ता की राम मंदिर चौराहे पर ही गर्ग प्रकाशन के नाम से दुकान है। यह अकाउंट गुप्ता दंपति ने मई 2012 में खुलवाया था। उस समय रवि गुप्ता को बैंक से पासबुक, चेकबुक के साथ एटीएम कार्ड भी मिला था।
कुछ ही दिनों में इस एटीएम कार्ड का एक्सेस कोड का सीलबंद लिफाफा भी श्री गुप्ता को प्राप्त हो गया, लेकिन श्री गुप्ता को एटीएम कार्ड का इस्तेमाल नहीं आता था, ऐसे में उन्होंने कार्ड कोड दोनों लिफाफों को उठाकर रख दिया। दो वर्ष तक इस खाते में उन्होंने पैसे जमा किए और जो भी भुगतान या ट्रांजेक्शन करना था, वह उन्होंने चेकों के माध्यम से किया। गत 12 सितंबर को उन्होंने एक भुगतान के लिए 50 हजार रुपए का चेक काटा था और इसके बाद 13 सितंबर को इतनी ही राशि का चेक काटकर दिया था। बैंक में ये चेक कैश हुए और 15 सितंबर को उनके खाते से दो बार में 12 हजार रुपए निकल गए। श्री गुप्ता ने जब इसे चेक किया, तो पता चला कि यह ट्रांजेक्शन एटीएम कार्ड के जरिए हुए हैं। चूंकि उन्होंने कार्ड का उपयोग नहीं किया था, ऐसे में उन्होंने बैंक प्रबंधन से संपर्क कर इस ट्रांजेक्शन की डिटेल मांगी और अपना कार्ड कोड भी दिखाए, लेकिन अब बैंक इसे उपभोक्ता की गलती मानकर पल्ला झाड़ रही है।
हेड ऑफिस पर टाल रहे मामला
जबखाताधारक ने इस मामले में बैंक प्रबंधन से शिकायत की, तो बैंक अधिकारियों ने साफ कहा कि श्री गुप्ता ने खुद ही पैसे निकाले होंगे। इसके बाद जब श्री गुप्ता ने कहा कि वह फुटेज और एटीएम डिटेल उपलब्ध कराएं, तो प्रबंधन ने इसे मुंबई स्थित हेड ऑफिस में भेजने की बात कहकर मामला टाल दिया। इसमें भी खाताधारक को 10 से 15 दिन तक इंतजार करने की बात कही गई।
बैंक प्रबंधन ने श्री गुप्ता को जो कार्ड कोड का लिफाफा दिया था, वो अभी भी सीलबंद है। आरबीआई की गाइडलाइन के मुताबिक बैंकों द्वारा ग्राहकों को एटीएम कार्ड का जो लिफाफा भेजा जाता है, उसमें एक निश्चित स्थान पर एटीएम कार्ड को गोंद लगाकर चिपका दिया जाता है, ताकि कार्ड अपने स्थान पर बना रहे। इसी प्रकार जो कोड का लिफाफा रहता है, वह इस तरह से पैक रहता है कि उसे फाड़कर ही कोड के बारे में पता लगाया जा सकता है।
सील बंद हैं लिफाफे
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