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बिना लक्ष्य के मंजिल नहीं मिलती: मुनिश्री

7 वर्ष पहले
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हमजब तक अपना लक्ष्य निश्चित नहीं करेंगे तब तक हमें मंजिल नहीं मिलती। जैसे तुम्हें ट्रेन से जाना है तो स्टेशन पहुंचकर लक्ष्य तो निश्चित करना ही पड़ेगा कि मुझे दिल्ली जाना है तभी तो दिल्ली का टिकट खरीदोगे और दिल्ली जाने वाली ट्रेन में बैठोगे। एक बालक को डॉक्टर बनने के लिए पहले फल को निश्चित करना पड़ेगा कि मैं डॉक्टर बन जाऊंगा तभी तो वह उस विषय का का चयन करेगा। यह विचार राष्ट्र संत मुनिश्री पुलक सागर ने रविवार को जैन छात्रावास में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

साधना और सतगुण सत्संग से आते हैंं: संतश्री

ग्वालियर| साधनाऔर सतगुण मानव में सत्संग करने से धीरे -धीरे आते हैं, जैसे बूंद -बूंद से सरोवर भर जाता है। भक्त नरसी मेहता हर दुख सुख की घडि़यों में प्रभु के भजन हरि कीर्तन में मस्त रहते थे। यह विचार रामस्नेही संप्रदाय के संत गोपालराम महाराज ने रविवार को रामद्वारा में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।