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पुलिस को हल्के में लेना ही पड़ गया भारी

7 वर्ष पहले
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मेरीबड़े-बड़े लोगों से पहचान थी, नेताओं के साथ उठना-बैठना था। इसलिए मैंने हमेशा ही पुलिस को हल्के में लिया। पुलिस को हल्के में लेना ही मुझे भारी पड़ गया। मैैं पहले से ही पुलिस से बचकर चलता तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता। यह बात पीएमटी फर्जीवाड़े में पकड़े गए डॉ. जगदीश सागर ने पुलिस अफसरों के सामने कही। डॉ. सागर का कहना था कि उसकी योजना अपने घर पर आयकर का छापा डलवाने की भी थी। ऐसा करवाकर वह दो नंबर की कमाई को एक नंबर में बदल लेता। डॉ. सागर से पुलिस जैसे ही फर्जीवाड़े से जुड़े लोगों के बारे पूछताछ करती है तो वह कुछ जानकारियां देता है और इसके बाद इधर-उधर की बातों में उलझा देता है।

डॉ. सागर से पूछताछ करना पुलिस अफसरों के लिए दिमागी मशक्कत का काम साबित हो रहा है। वह पुलिस अफसरों को उनके काम की बातें कम बताता है और इधर-उधर की बातों में ज्यादा उलझा देता है।

एकऔर फर्जी छात्र पकड़ा: झांसीरोड थाने में 2010 बैच के चार छात्रों के खिलाफ एफआईआर करने के बाद पुलिस ने एक छात्र धर्मेंद्र शाक्य को हिरासत में ले लिया है। मुरैना में रहने वाले धर्मेंद्र ने पुलिस को बताया है कि उसने ढाई लाख रुपए देकर प्रवेश लिया था। रुपयों का इंतजाम कैसे हुआ, इसके दस्तावेज पुलिस जुटा रही है।

संपत्ति राजसात करने की नहीं बनाई योजना

पीएमटी में फर्जीवाड़ा करने वालों ने इसमें करोड़ों रुपए कमाए, यह जांच करने वाले अफसर भी मानते हैं लेकिन इस फर्जीवाड़े की कमाई को राजसात करने के लिए क्या किया जाए इसकी योजना अब तक पुलिस ने नहीं बनाई है। इक्का-दुक्का मामलों में पुलिस ने मास्टर माइंड की छोटी-मोटी संपत्ति जब्त की है लेकिन बड़ी संपत्तियों को खुर्द-बुर्द करने का इन्हें पूरा मौका दिया गया। पुलिस अफसर भी मानते हैं कि इसमें 50 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपति बनाई है। इसके बाद भी संपत्ति का हिसाब-किताब इकट्ठा करने और कार्रवाई के लिए कोई योजना नहीं बनाई।