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नियमित होने तक कर्मचारियों को मिलेगा न्यूनतम वेतनमान
नगरनिगम के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित किए जाने का प्रस्ताव सोमवार को परिषद की बैठक में सर्वसम्मति से पास किया गया। इस प्रस्ताव को राज्य शासन के पास सूचनार्थ भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति आने तक कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान का लाभ दिया जाएगा। इतना ही नहीं, निगम सेटअप में कंप्यूटर पंप ऑपरेटरों के पद नहीं होने पर ऐसे कर्मचारियों को डाटा एंट्री के पदों पर समायोजित करने का निर्णय लिया गया।
नगर निगम के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के नियमतीकरण के प्रस्ताव पर नगर निगम कमिश्नर अजय गुप्ता ने जवाब प्रस्तुत करते हुए कहा कि कर्नाटक सरकार विरुद्ध करुणा देवी मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आदेश दिया था कि 10 अप्रैल 2006 को 10 वर्ष की सेवा करने वाले कर्मचारियों का नियमतिकरण किया गया था। उसी आधार पर निगम में काम करने वाले कर्मचारियों को नियमित किया जा सकता है। इस मामले पर महापौर समीक्षा गुप्ता ने भी अपनी सहमति दी। नेता प्रतिपक्ष शम्मी शर्मा एवं देवेंद्र तोमर ने कहा कि कमिश्नर का जवाब अपूर्ण है। इस आदेश में एक भी कर्मचारी नियमित नहीं हो सकेगा। उन्होंने कहा कि निगम में वर्ष 1996 से पहले कर्मचारी नियमित हो सकेंगे। आनंद शर्मा ने कहा कि कमिश्नर बताएं कि कितने कर्मचारी नियमित होंगे, कितने कर्मचारियों को लाभ मिलेगा या नहीं। अपर कमिश्नर आरके श्रीवास्तव ने कहा कि 10 अप्रैल 2006 तक जिनकी सेवा 10 साल पूर्ण हो चुकी है, उन्हें नियमित किया जाएगा। लेकिन कितने कर्मचारी लाभान्वित होंगे इसकी जानकारी अभी नहीं है। पुरुषोत्तम भार्गव ने कहा कि निगम में स्थायी से ज्यादा अस्थायी कर्मचारी काम कर रहे हैं। भाजपा पार्षद सतीश बौहरे ने कहा कि निगम के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का नियमतीकरण होना चाहिए। सदन के सभी पार्षद भी सहमत हैं। सभापति ने कर्मचारियों के मामले में विचार करने के लिए पंद्रह मिनट के लिए बैठक स्थगित की। इस दौरान कर्मचरी कल्याण मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक खान मौजूद थे।
नियमितीकरण का प्रस्ताव पारित होने के बाद प्रसन्नता जताने परिषद में पहंुच गए दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी।
परिषद की बैठक में नियमितीकरण को लेकर डायरेक्शन देते सभापति बृजेंद्र सिंह जादौन।
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