आपका आज ही बीते हुए कल का प्रमाण पत्र
तुम्हाराआज ही बीते हुए कल का प्रमाण पत्र है। आज बुढ़ापा है तो कल जवानी भी रही होगी। आज जवानी है तो बचपन भी रहा होगा। बचपन है तो जन्म भी हुआ होगा। जन्म हुआ है तो गर्भ भी रहा होगा और गर्भ में आने से पहले भी नर कुछ तो रहा ही होगा। मतलब इस जन्म से पहले भी जन्म था। यह आत्मा अमर, अजर है। जन्म के बाद जन्म होते रहे हैं। तुमने अपनी आयु में अभी तक ऐसा क्या कार्य किया है जिससे लोग तुम्हारे जाने के बाद भी तुम्हें याद करें। यह विचार राष्ट्र संत मुनिश्री पुलक सागर महाराज ने सोमवार को जैन छात्रावास में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
मुनिश्री पुलक सागर ने कहा कि मात्र दूसरों को गाली देने या बुरा भला कहने में कौन सी महानता होती है। मेरे भाई, जीते जी इस जीवन में कुछ ऐसा कर जाओ कि तुम्हारा नाम आदर्श पुरुषों में लिख जाए।
हिंसा मिटाने के लिए हृदय परिवर्तन की जरूरत
धर्मसभा में भक्तों को संबोधित करते राष्ट्रसंत मुनिश्री पुलक सागर।
हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने सोमवार को मुनिश्री पुलक सागर से जैन छात्रावास में आशीर्वाद लिया। मुनिश्री ने राज्यपाल से कहा कि आज हिंसा प्रशिक्षित रूप में पनप रही है। हिंसा मिटाने के लिए हृदय परिवर्तन की जरूरत है। हृदय परिवर्तन हथियारों से नहीं हाेगा। इसके लिए महावीर के सिद्धांत की जरूरत है। इस मौके पर चातुर्मास कमेटी ने राज्यपाल प्रो. सोलंकी का शॉल पहनाकर और स्मृति चिह्न भेंट कर अभिनंदन किया। इस मौके पर महापौर समीक्षा गुप्ता, डॉ. वीरेंद्र कुमार गंगवाल, पारस जैन, दिनेश जैन भी उपस्थित थे।