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धनवान वही जिसके पास संतोष रूपी धन है: संत रमेश लाल

7 वर्ष पहले
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जीवनमें संतोष होना चाहिए। धनवान वही है जिसके पास संतोष रूपी धन है। जिसे संतोष है वास्तव में वही परम सुखी है। यह विचार दादाजी धाम के संत रमेश लाल ने सोमवार को सुभाष मार्केट के पीछे स्थित धर्मपुरी मंदिर में भागवत कथा सुनाते हुए व्यक्त किए।

संत रमेश लाल ने कहा कि इतनी गरीबी के बाद भी सुदामा ने कभी अपना ज्ञान नहीं बेचा। क्योंकि ज्ञान बेचने की नहीं, बांटने की चीज है। कथा रूपी ज्ञान भी अनमोल है। इसका विक्रय नहीं किया जाता है। इसे तो बांटा जाता लेकिन आजकल तो कई वक्ता पहले ही तय कर लेते हैं कि इतना चाहिए तब कथा होगी। अरे कथा को तो मां के दूध की उपमा दी गई है। जिस प्रकार मां का दूध बच्चों का पालन पोषण करता है। उसी प्रकार कथा रूपी ज्ञान अमृत हमारे जीवन रूपी धन का पोषण करता है।

संतश्री ने कहा कि शास्त्र कहते हैं कथा सत्संग से सरल कोई साधन नहीं है आत्म ज्ञान पाने का। परमात्मा कहते हैं तू सबको छोड़कर मेरी शरण में जा, तेरा कल्याण हो जाएगा। कथा के अंत में भागवत पुराण की आरती उतारी गई।