\"सभी के प्रति प्रेम रखो\'
प्रभुसभी जीवों का पोषण करते हैं, चाहे वह पशु हो या इंसान। इसीप्रकार हमें भी सभी के प्रति प्रेम रखना चाहिए। यह विचार रामस्नेही संप्रदाय के संत गोपालराम ने सोमवार को लक्ष्मीगंज स्थित रामद्वारा में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
संतश्री ने कहा कि संतों की मंडली के भजन सुनकर नरसी मेहता को वैराग्य हो गया। सारी धन-संपत्ति एक वर्ष में दान कर दी। हाटकेश्वर महादेव के मंदिर में शिवलिंग की पूजा करना प्रारंभ कर दिया। सात दिन बाद भगवान शिव ने दर्शन दिए। संतश्री ने कहा कि लिंग का संस्कृत भाषा में अर्थ होता है चिन्ह, प्रतीक। शिवलिंग का अर्थ है शिव का प्रतीक। शिव भक्ति में लीन होकर मनुष्य को सदगति प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि ब्रह्माण्ड में उपस्थित समस्त ठोस तथा ऊर्जा ज्योतिर्लिंग में निहित हैं। शिव लिंग हमारे ब्रह्माण्ड की आकृति है। ब्रह्माण्ड में दो ही चीज हैं। ऊर्जा आैर पदार्थित तत्व। हमारा शरीर पदार्थ से निर्मित है और आत्मा ऊर्जा है। योनि का संस्कृत में प्रादुर्भाव प्रकटीकरण अर्थ होता है। जीव अपने कर्मों के अनुसार विभिन्न योनियों में जन्म लेता है। मनुष्य योनि, पशु योनी सहित कुल 84 लाख योनियां होती हैं। इसे वैज्ञानिक भी मानते हैं। सनातन धर्म सत्य धर्म है, कोई धंधा नहीं है। इसे नरसी भगत जैसे प्रभु के बंदे ही समझ पाते हैं। कई पाखण्डी जगत में भगत बनकर धर्म को धंधा बना लेते हैं और भक्तों को भी प्रभु की बंदगी से वासनाओं की तरफ ले जाने की कोशिश करते हैं। इससे सावधान रहना आवश्यक है।