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बिना प्लानिंग खर्च कर दी, एक करोड़ की राशि

7 वर्ष पहले
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राजमाताविजयाराजेसिंधिया एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने एग्रीकल्चर साइंस म्यूजियम बनाने में इतनी जल्दबाजी दिखाई कि बजट का ध्यान ही नहीं रखा। आईसीआर से मिले बजट को आनन-फानन में ठिकाने लगा दिया गया। लेकिन म्यूजियम कैसे बनेगा, इसकी प्लानिंग नहीं की।

म्यूजियम शुरू करने के लिए पांच करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयारी किया गया है। इस प्रस्ताव को आदिम जाति कल्याण विभाग को भी भेजा गया, लेकिन विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। अब तो यूनिवर्सिटी के पास बजट है और ही कोई बजट स्वीकृत कर रहा है। ऐसे में म्यूजियम कैसे बनेगा, इसका जवाब यूनिवर्सिटी के अफसरों के पास नहीं है।

म्यूजियम बनाने पर नहीं दिया ध्यान

म्यूजियमशुरू होने के कारण यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने बिल्डिंग में लाइब्रेरी शुरू कर दी। अब अधिकारियों का कहना है कि लाइब्रेरी का भवन बन रहा है, भवन तैयार हाेते ही लाइब्रेरी को वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा।

छात्र कर सकते थे रिसर्च

कृषिविषय के छात्र इस म्यूजियम के बनने से रिसर्च कर सकते थे। यहां कृषि विज्ञान की बेहतरीन किताबों से लेकर सभी आधुनिक रिसर्च भी यहां देखने को मिलेंगे।

आदिवासी विकास का पहला म्यूजियम

इसम्यूजियम में आदिवासी विकास, कृषि के प्रकार, उनका इतिहास आदि को लाइव देखा जा सकेगा। देश में इस तरह का अभी कोई भी म्यूजियम नहीं है। यही कारण है कि बजट के लिए आदिम जाति विकास को प्रस्ताव भेजा गया है।

लाइव होती देश की कृषि प्रणाली

म्यूजियम में अलग-अलग प्रदेशों की कृषि प्रणाली को लाइव देखा जा सकता था। म्यूजियम में प्राचीन आधुनिक कृषि यंत्र, बीज तथा कीटनाशक की जानकारियां तुरंत मिलनी थीं। वैज्ञानिक खेती की जानकारी भी म्यूजियम में लाइव दिखाई जाती। इसके अलावा देश भर में इस म्यूजियम को ऑनलाइन देखा जा सकता था। यही नहीं बिग स्क्रीन तथा साउंड सिस्टम के माध्यम से कृषि से संबंधित जानकारी यहां आने वाले लोगों को मिलनी थी।

^बजट केलिए भेजा है प्रस्ताव

यूनिवर्सिटी,एग्रीकल्चर साइंस म्यूजियम शुरू कर रही है। एक करोड़ की लागत से भवन तो बन गया, लेकिन दो साल से बजट नहीं मिलने से म्यूजियम का इंटीरियर डेकोरेशन अन्य संसाधन नहीं जुटाए जा सके हैं। हमने आयुक्त जनजाति क्षेत्रीय विकास योजना को छह करोड़ का प्रस्ताव स्वीकृति के लिए भेजा है।

डॉ.वायएस कूल, डायरेक्टर,प्लानिंग, राजमाता विजयाराजे