पापी को कर्म देता है सजा: मुनिश्री
ग्वालियर| एकधर्म की अदालत हाेती है, एक कर्म की। कर्म की अदालत में कोई यदि छल कपट से सजा पाने से बच भी जाए तो धर्म की अदालत में नहीं बचेगा। पाप और अपराध में बहुत अंतर होता है। अपराधी को सजा कानून देता है लेकिन पापी को सजा कर्म के अनुसार मिलती है। भगवान महावीर के कानून में चोरी के विचार अाने पर भी उसे सजा देने का प्रावधान है। यह बात शुक्रवार को मुनिश्री पुलक सागर ने जैन छात्रावास में अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कही।
मुनिश्री ने कहा कि एक तरफ सफलता हो और एक तरफ सिद्धांत हो, तो सफलता से पहले सिद्धांत काे चुनो। सफलता से तो केवल प्रशंसा मिलती है लेकिन सिद्धांत से प्रसिद्धि मिलती है।