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ग्वालियर को बनाएं जयपुर की तरह हैरिटेज सिटी

7 वर्ष पहले
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यदिग्वालियर को पर्यटन के नक्शे पर उभारना है तो सबसे पहले हर ग्वालियरवासी को शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के प्रति गौरव का भाव जगाना होगा। इतिहास ने इस शहर और आस-पास के अंचल को जितनी विरासत से नवाजा है उतना प्रदेश के किसी दूसरे शहर को नहीं। ग्वालियर को जयपुर की तरह हेरिटेज सिटी के रूप में पहचान दिलाने की तमाम संभावनाएं मौजूद हैं। जरूरत है शहर की आवाज उठाने वाले सामाजिक और व्यावसायिक संगठन इस बारे में सजग और जागरूक होकर स्थानीय प्रशासन और सरकार के नुमाइंदों पर जरूरी कदम उठाने के लिए दबाव बनाएं।

य़ह विचार दैनिक भास्कर के स्थानीय संपादक सुनील शुक्ला ने शुक्रवार को इंडियन इंस्टीट्यूट आफ टूरिज्म एंड ट्रेवल मैनेजमेंट (आईआईटीटीएम) में विश्व पर्यटन दिवस के संदर्भ में आयोजित परिसंवाद में व्यक्त किए। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि मप्र चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज ग्वालियर के अध्यक्ष विष्णु गर्ग, सचिव भूपेंद्र जैन एवं इंस्टीट्यूट की नोडल आफिसर डाॅ.मोनिका प्रकाश ने भी पर्यटन की संभावनाओं पर विचार रखे।

श्री शुक्ला ने कहा कि यदि स्थानीय प्रशासन एवं सरकार हकीकत में क्षेत्र में पर्यटन के विकास के लिए चिंतित है तो उसे सबसे पहले प्रतिष्ठित टूर आपरेटर्स से सलाह लेकर घरेलू और विदेशी सैलानियों के लिए जरूरी सभी सुविधाएं सुनिश्चित करनी चाहिए। खासतौर पर दिल्ली-आगरा-जयपुर में सक्रिय टूर आपरेटर्स के बीच। जो पर्यटकों को झांसी, ओरछा होते हुए खजुराहो तक ले जाते हैं लेकिन ग्वालियर नहीं रुकते। यदि हम टूर आपरेटर्स को भरोसे में लेकर इन सैलानियों को ग्वालियर लाने में कामयाब हो जाएं तो क्षेत्र में रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ने के साथ शहर की सकारात्मक ब्रांडिंग में भी मदद मिलेगी। इस अपेक्षित पहल में आईआईटीटीएम और चैंबर जैसी संस्थाओं को भी जोड़ा जाना चाहिए।

विशेष अतिथि विष्णु गर्ग ने लोकल लेवल पर टूरिज्म डवलपमेंट को एकसाथ लाने की बात कही। चैंबर के सचिव भूपेंद्र जैन ने कहा कि ग्राउंड लेवल पर इसके लिए काम करने की जरूरत है। फाइन आर्ट फोटोग्राफर रचना शुक्ला ने कहा कि ग्वालियर में 8वीं से लेकर 19वीं शताब्दी तक की विरासत मौजूद है।

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आईआईटीटीएम में परिसंवाद में (दाएं से) दैनिक भास्कर के स्थानीय संपादक सुनील शुक्ला, चैंबर अध्यक्ष बिष्णु गर्ग, सचिव भूपेंद्र जैन और इंस्टीट्यूट की नोडल ऑफ