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नौ लोगों ने किया है जमीन पर अितक्रमण

7 वर्ष पहले
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15 हजार रुपए वर्गमीटर है रेट

^जमीनों कोसुरक्षित कराएंगे

मैंनेहाल ही में चार्ज लिया है, इसलिए मुझे इस मामले की ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन अगर जीडीए की जमीन है, तो उनका परीक्षण कर सुरक्षित कराने की कार्रवाई की जाएगी।

सुरेशशर्मा, सीईओ,ग्वालियर विकास प्राधिकरण

ग्वालियर

जीडीएकी इस जमीन के अलावा सर्वे क्रमांक 462 पर भी स्थानीय लोगों ने अतिक्रमण कर पक्के मकान बना लिए हैं। ओमप्रकाश कुशवाह ने ही इस मामले की शिकायत तहसीलदार से की थी। इस आधार पर तहसीलदार ने पटवारी से जांच रिपोर्ट तलब की। पटवारी ने अपनी जांच रिपोर्ट में सात स्थानीय परिवारों को अतिक्रमणकर्ता के तौर पर पेश किया।

इन परिवारों ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया और एसडीएम कोर्ट में भी अपील की। इसके बाद आरआई से दोबारा जांच कराई गई। आरआई की रिपोर्ट में मौके पर नौ लोगों को अतिक्रमणकर्ता साबित कर दिया गया। इन लोगों ने जीडीए द्वारा बनाए गए आम रास्ते की जमीन पर मकान बना लिए थे। इनमें ठाकुरदास, मुनीम, श्रीकृष्ण, राजकुमार, पूरन सिंह, सतनाम सिंह, भजन सिंह, केशव सिंह नंदिनी सिंह का नाम शामिल है। जमीन पर अतिक्रमण करने वाले इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है।

तहसीलदार राजस्व निरीक्षक द्वारा की जा रही बटांकन की कार्रवाई को रोकने के लिए ग्वालियर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने तहसीलदार को पत्र लिखे थे। सीईओ ने भी साफ लिखा था कि जिस जमीन का बटांकन किया जा रहा है, वह असल में जीडीए के मालिकाना हक की है। ऐसे में वहां बटांकन सीमांकन जैसी कोई कार्रवाई की जाए। इसके बावजूद राजस्व निरीक्षक को आदेश देकर मौके पर सीमांकन की कार्रवाई करा दी गई थी।

^मिलीभगत करहो रहा कब्जा

जिसजमीन पर ओमप्रकाश कुशवाह उनके भाई निवास कर रहे हैं, वह सोसायटी के माध्यम से जीडीए को वर्ष 1989 में ही सरेंडर की गई थी और बदले में जीडीए ने प्लॉट आवंटित किए थे। इसके बाद भी जीडीए की जमीन पर लगातार अतिक्रमण किया जाता रहा। हाल ही में इस सरकारी जमीन के सीमांकन और बटांकन की कार्रवाई की गई, तो जीडीए ने भी पत्र लिखकर कार्रवाई रोकने के लिए कहा था। इसके बावजूद तहसीलदार और आरआई ने मौके पर सीमांकन और बटांकन की कार्रवाई की है। हमने इसकी शिकायत लोकायुक्त कलेक्टर से भी की है।

राकेशसिंह कुशवाह, शिकायतकर्ता

हमारे मालिकाना हक की जमीन है