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7 दिन, 80 गांव, 50 लोगों पर नजर, तब मिला शेरा

7 वर्ष पहले
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6 साल में 14 अपराध, आखिरी चार महीने में कीं 10 वारदात

खौफनाक शेरा

दबाव में ही काम कर पाती है पुलिस

शेराका खात्मा करने में पुलिस को अचानक सफलता नहीं मिली। इसके लिए पुलिस ने पिछले सात दिन में भिंड, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, आगरा, धौलपुर, सवाई माधौपुर और भरतपुर के 80 गांव की खाक छानी। शेरा ने पिछले सात दिन से अपना मोबाइल बंद कर रखा था। पुलिस ने इससे जुड़े लगभग 50 लोगों पर नजर रखी। तब शेरा का सुराग मिल सका।

पुलिस ने 2 दिसंबर को सागरताल रोड पर शेरा के दो साथी विक्की और सोनू को मार गिराया था। इनकी घेराबंदी के दौरान पुलिस को पता चला था कि गिरोह का सरगना शेरा किरार है। यह बड़े कारोबारियों को मारकर खौफ कायम करना चाहता है। पुलिस के अत्याधुनिक हथियार भी इसके टारगेट पर हैं। इसके बाद पुलिस ने इसकी घेराबंदी शुरू कर दी। इस बीच इसने जौरा में पेट्रोल पंप संचालक गिर्राज अग्रवाल की हत्या कर दी। इसके बाद पुलिस के सामने चुनौती थी कि शेरा को अन्य वारदात करने से रोका जाए। ग्वालियर और मुरैना पुलिस ने अपने सारे संसाधन शेरा की तलाश में झोंक दिए। शेरा की लोकेशन मुरैना के आसपास मिल रही थी। इसके बावजूद ग्वालियर पुलिस की क्राइम ब्रांच और कुछ चुनिंदा पुलिसकर्मी मुरैना में शेरा को तलाशते रहे। शेरा के संपर्कों की जानकारी शिवपुरी, श्योपुर, धौलपुर, आगरा, सवाई माधौपुर, भरतपुर के कुछ गांवों में मिली थी। आगरा में शेरा की बहन की ससुराल थी इसके अलावा कुछ और रिश्तेदार भी यहां रहते थे। पुलिस ने ऐसे पचास लोगों को चिह्नित किया जिनसे शेरा संपर्क कर सकता था या पहले संपर्क में रहा था। एक सप्ताह तक खुफिया तरीके से इन लोगों की निगरानी की गई। तभी शुक्रवार की सुबह पुलिस को पता चला कि शेरा नूराबाद के नजदीक स्थित खरगापुर-भर्राड़ से बाइक पर सवार होकर निकला है। बस यह सूचना पुलिस के लिए काफी थी, इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी की और उसका खात्मा कर दिया।

दबाव में काम करना मुश्किल होता है लेकिन ग्वालियर की पुलिस दबाव में ही अच्छे परिणाम दे पाती है। पुराने कई ऐसे मामले हैं जिनमें पुलिस पर दबाब नहीं रहा और यह मामले अब तक अनसुलझे ही रहे हैं लेकिन जिन मामलों में पुलिस के ऊपर दबाव रहा उनमें पुलिस ने जल्द ही बेहतर परिणाम भी दिया।

पुलिस पर दबाव नहीं बनने पर अनसुलझे रह गए यह मामले

Áदससालपहले झांसी रोड थाना क्षेत्र में