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परिवहन विभाग में बिना पावर के प्रभार

7 वर्ष पहले
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परिवहनके फूफ (भिंड) चेकपोस्ट पर ड्राइवर को पढ़ोरा (शिवपुरी) चेकपोस्ट पर हवलदार को प्रभारी बनाया गया है। हालांकि विभागीय नियमों में चेकपोस्ट पर चालान का अधिकार एसआई इंस्पेक्टर को ही रहता है। परिवहन में यह स्थिति इंस्पेक्टर, एसआई की कमी और लगातार वीआरएस के कारण बन गई है। साढ़े तीन माह में एक हजार करोड़ रुपए की वसूली का लक्ष्य है और आलम यह है कि आयुक्त का पद भी खाली है।

परिवहन के संवेदनशील सी श्रेणी के फूफ चेकपोस्ट का प्रभार ड्राइवर रामनिवास कुशवाह पर है। बी श्रेणी के पढ़ोरा (शिवपुरी) का प्रभार भी हवलदार भरत रावत पर है। शासन के नियमों में इंस्पेक्टर एसआई को ही जुर्माना चालान बनाने के अधिकार रहते हैं। परिवहन के ये दोनों ही चेकपोस्ट पढोरा (25-30 लाख) फूफ (15-20 लाख) लगभग मासिक राजस्व वसूली वाले हैं। अब सवाल यह उठता है कि जब चेकपोस्ट प्रभारी को जुर्माना चालान बनाने के अधिकार ही नहीं हैं तो यहां राजस्व वसूली कैसे की जा रही है।

विभाग में अफसरों की कमी लंबे अर्से से है। विभाग में इंस्पेक्टर के 74 पद हैं, जबकि उपलब्ध 42 हैं। इनमें से भी चार हाल ही में वीआरएस ले चुके हैं। इस कमी के चलते ही पुलिस के अधिकारियों को चेकपोस्ट की गतिविधियां संचालित करने के लिए प्रतिनियुक्ति पर लिया जाता है।

टारगेट बड़ा, इसलिए हो रहे वीआरएस?

परिवहनमें वर्ष 2014-15 के लिए राजस्व वसूली का लक्ष्य 2 हजार करोड़ रुपए निर्धारित किया था। लगभग नौ माह गुजरने के बाद विभाग लगभग 1 हजार करोड़ का ही राजस्व प्राप्त कर सका है। अब मात्र साढ़े तीन माह शेष हैं और विभाग को 1 हजार करोड़ की राजस्व वसूली करना है। बड़ा टारगेट और पदस्थापना नई जगह होने से अफसरों को टारगेट पाना मुश्किल लगने लगा है। विभाग में एक साथ अधिक संख्या में वीआरएस आवेदन आने के पीछे महत्वपूर्ण वजह यह भी है। जबकि विभाग के उच्चाधिकारियों का मानना है कि महकमे के अफसर मनमर्जी से नौकरी करने के आदी हो गए हैं। अब जब उन्हें चेकपोस्ट से हटाकर जिले में तैनाती दी गई तो उन्हें रास नहीं रहा है।

चेकपोस्ट का प्रभार दिया

^चेकपोस्टका प्रभार दिया गया है, इसलिए प्रभारी को अधिकार भी दिए जा सकते हैं। आरकेजैन, प्रभारीआयुक्त, परिवहन

एसआई से छोटा अफसर नहीं ले सकता जुर्माना

^मोटरव्हीकल एक्ट 1988, सेक्शन 130 वर्ष 1994 के रूल 105 में यह प्रावधान है कि सब इंस्प