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एक बार में 12 माह तक बंदी बनाने का अादेश विधि संगत नहीं: कोर्ट
ग्वालियर| रासुकाके तहत एक बार में लगातार 12 माह के निरोध संबंधी आदेश को कोर्ट ने गलत ठहराया है। साथ ही रासुका के तहत गलत तरह से कार्रवाई करने पर हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने शासन पर पांच हजार रुपए की कॉस्ट लगाई। जस्टिस एसके गंगेले जस्टिस शील नागू की डिवीजन बेंच में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विजय दत्त शर्मा दीपेंद्र सिंह कुशवाह ने तर्क रखा कि रासुका के तहत कलेक्टर एक बार में तीन माह से ज्यादा निरोध में रखने के आदेश नहीं कर सकता। वहीं रासुका लगाने के लिए यह भी आवश्यक है कि उसके आधार काे विधि पूर्वक स्पष्ट किया जाए। कोर्ट ने याचिका सुनवाई के बाद स्वीकार कर ली।
भिंड निवासी संजीव सिंह के खिलाफ थाने में कुछ मामले दर्ज थे। भिंड कलेक्टर ने उक्त आरोपी पर रासुका के तहत कार्रवाई करते हुए एक साल तक निरोध में रखने के आदेश दिए। इसके तहत उक्त आरोपी संजीव सिंह सितंबर 2014 से जेल में बंद है। रासुका के उक्त आदेश के खिलाफ कोर्ट में अपील की गई। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के बाद भिंड कलेक्टर के उक्त आदेश को खारिज करते हुए, शासन पर पांच हजार रुपए की कॉस्ट भी लगाई।