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मोक्ष प्राप्ति का सरल साधन है सत्संग: संतश्री
सत्संगमोक्ष का सरल साधन है। सत्संग से व्यक्ति को आत्मज्ञान हो सकता है। इसलिए हर व्यक्ति को सत्संग में अवश्य जाना चाहिए। यह विचार रामस्नेही संप्रदाय के संत गोपालराम ने रविवार को लक्ष्मीगंज स्थित रामद्वारा में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
संतश्री ने कहा कि भक्ति, भक्त, भगवंत और गुरु नाम शब्द तो चार हैं लेकिन इसमें व्याप्त शक्ति और शरीर एक ही है। इनके चरणों में वंदन करने से ही अनेक विघ्नों का नाश हो जाता है। भक्त नरसी मेहता ने भी इन चारों को अपने जीवन का आधार माना। भक्त नरसी मेहता कहते थे कि जब भक्ति भोजन में मिलती है तो प्रसाद बन जाता है और जब पानी में मिलती है तो चरणामृत बन जाता है। भक्ति प्रवास में मिलती है तो तीर्थ यात्रा बन जाती है। संगीत में मिल जाए तो कीर्तन बन जाती है। भक्ति कर्म में मिल जाए तो वह सेवा बन जाती है। भक्ति व्यक्ति में मिल जाती है तो वह वैष्णव बन जाता है।