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तुम्हारे अंदर नाम का खजाना है, बस! ताला खोलने की जरूरत है

7 वर्ष पहले
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ग्वालियर| तुम्हारेअंदर राम-नाम की कोठरी में खजाना भरा है। लेकिन ताला बंद होने के कारण कंगाल बने हुए हो। उसे पाने के लिए दिशाहीन हाेकर इधर-उधर भटक रहे हो। ताला खोलने के लिए हृदय में प्रेम जगाना पड़ेगा। जब प्रेम जागेगा तो सद्गुरुदेव ताला खोल देंगे और प्रभु प्रकट हो जाएगा। भगवान शिव का वचन है-\\\'हरि व्यापक सर्वत्र समाना, प्रेम से प्रकट होहिं मैं जाना\\\'। यह विचार रविवार को मानव उत्थान सेवा समिति की ओर से तानसेन रोड स्थित श्रीहंस-विभु आश्रम में मानव धर्म के प्रणेता सतपाल महाराज के जन्मोत्सव पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी कल्पना बाई ने व्यक्त किए। साध्वीश्री ने कहा कि हमें महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। महापुरुषों के जन्मदिन पर हम उनके बताए मार्ग पर चलने का निश्चय करके अपने जीवन को सफल बना सकते हैं।

बाहरीपढ़ाई से पेट भर सकते हो, सुख और आनंद नहीं मिलेगा

साध्वीअंबालिका बाई ने कहा- माता-पिता पैसा खर्च कर अपने बेटे-बेटियों को पढ़ाते हैं। बड़ी-बड़ी डिग्रियां हासिल करते हैं। इसके बाद वही बच्चे अपने माता-पिता को ठुकरा देते हैं। ऐसी पढ़ाई और डिग्री किस काम की, जिसे हासिल करने के बाद वह बड़ों-बुजुर्गों का सम्मान तक करें। आखिर गलती कहां हुई। अपने अंदर झांको, तो पता चलेगा कि गलती हमारी ही है। क्योंकि हमने ही अपने बच्चाें को संस्कार नहीं दिए। साध्वीश्री ने कहा कि हमारी संस्कृति, हमारे ग्रंथ सिखाते हैं-प्रात: काल उठिके रघुनाथा, मातु पिता गुरु नावहिं माथा। भगवान राम सबसे पहले अपने माता-पिता और गुरु को प्रणाम करते थे। याद रखना, बाहरी पढ़ाई से विद्वान बन सकते हो, अपना पेट भर सकते हो। लेकिन ज्ञानवान नहीं हो सकते और जब ज्ञानवान हो जाओगे तो जीवन सुख और आनंद से भर जाएगा। इसके लिए अंदर की पढ़ाई भी करनी पड़ेगी। साध्वीश्री ने कहा कि हमें महाराजश्री के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। कार्यक्रम को महात्मा वीतरागानंद, साध्वी दयामतीबाई, साध्वी लक्ष्मीबाई ने भी संबोधित किया। समारोह का संचालन नंदकिशोर जोशी ने किया।